मुर्दा मछली हलाल क्यूँ है जबकि वह ज़िब्ह नहीं की जाती ?

 मुर्दा मछली हलाल क्यूँ है जबकि वह ज़िब्ह नहीं की जाती ?



 विज्ञान (scince)ने गैर मुसलमानों के सबसे बड़े सवाल का जवाब दे दिया

इस्लाम ने हलाल चीज खाने का हुक्म  देते हुए हराम चीज खाने  से मना किया है और ऐसे जानवर का गोश्त का इस्तेमाल करने के लिए हुक्म  दिया है जो इस्लामी तरीके अल्लाह का नाम से ज़िबह किया गया हो।

ईश्वर सबसे बड़ा विज्ञान है उसे पता है और इंसानी  विज्ञान को पता करना पड़ता है किस में हानि है और किस में नहीं इसलिए आज से 1400 साल पहले अल्लाह ने अपनी किताब में इसका जिक्र कर चूका है की झटके से मारे गए जानवर और बगैर अल्लाह का नाम लिए हुवे जानवर का गोश्त इस्लाम में हराम है)

गैर मुस्लिम का सवाल?

गैर मुस्लिम  इस्लाम के इस हुक्म के  मुताल्लिक  मछली के बारे मे सवाल करते हैं कि उसे ज़िबह नहीं किया जाता और ना ही जीवित रहता है तो यह कैसे हलाल हो गई

 लेकिन अब विज्ञान (SCINCE) ने इस सवाल का जवाब दे दिया है और ऐसा आश्चर्ज चकित खुलासा किया है! अल्लाह ने दुनिया में मौजूद हर जीव जंतु  को इंसान के फायदे के लिए बनाया है और ऐसा ही मामला मछली के साथ भी है वो  जैसे ही पानी से बाहर आती है तो उसके शरीर में मौजूद सभी रक्त तुरंत अपना रास्ता बदल लेता है और मछली के मुंह में इकठ्ठा होकर " एपीगलोटस" में जमा होना शुरू हो जाता है और मछली के मांस में जरा सा भी रक्त नहीं रहता ।इस तरह  उसका  गोश्त पाक और हलाल रहता है और यही कारण है कि मछली ज़िबह  करने की जरूरत ही पेश नहीं आती  और जिस दौरान मछली का गोश्त बनाया जाता है तो उसी दौरान ममछली के " एपीगलोटस"को बाहर निकाल दिया जाता है जैसे जानवर का गोस्त इस्लामिक तरीके से बनाने पर मांस में एक भी बून्द रक्त नहीं रहता उसी तरह मछली में भी एक बून्द रक्त नहीं रहता ।

यही नहीं विज्ञान (SCINCE) ने इस्लाम में हलाल भोजन के हुक्म  के पीछे छिपे तथ्य को भी उजागर किया है जिससे गैर मुस्लिम भी आस्चर्ज चकित  रह गए हैं क्योंकि जब किसी जानवर को ज़िबह किया जाता है तो उसके दिल और दिमाग का संपर्क समाप्त नहीं होता और दिल जानवर की वाहिकाओं और धमनियों में मौजूद सभी रक्त बाहर निकलने तक धड़कता रहता है और इस तरह उसका गोश्त खून से पाक साफ और हलाल हो जाता है।

दूसरी ओर जब किसी जानवर को गैर इस्लामी तरीके से  यानी "झटके"  से मार दिया जाता है तो उसका दिल भी तुरंत झटके से बंद कर देता है और इस तरह शरीर से खून निकल ही नहीं पाता। वैज्ञानिकों का मानना है कि विभिन्न प्रकार के गंभीर रोग पैदा करने वाले जरासीमों और बैक्टरियाज़ के  प्रजनन के लिए रक्त बहुत अच्छा माध्यम है और जब जानवर के शरीर से खून निकल ही नहीं पाता तो यह गोश्त ही खराब कर देता है और जब इंसान उसे खाता हैं तो कई बीमारियों से शिकार हो जाता हैं।


याद रखिये ज़िबह किये हुए गोश्त की फ्रिज (FREJE) लाइफ झटके के गोश्त से कहीं ज़्यादा होती है। इसीलिए कहा जाता है के इस्लाम 100 फीसद एक प्राकृतिक तथा वैज्ञानिक धर्म है।

इस्लाम पूरी दुनिया के मानवता के लिए सही मज़हब है.क्योंकि वह एक ईश्वर भगवान अल्लाह  को पूजने का हुक्म देता है.और इस्लाम के  नियम ईश्वर अल्लाह खुदा ने ख़ुद बनाए है अपने बंदो के लिए, आज विज्ञान इस्लाम के हर नियम पर तहक़ीक़ कर रहा है, और संतुष्ट भी हो रहा है,