किस्सा शागिर्द और हजरत ईशा अलैहिस्सलाम | का कहानी ,वाकिया






किस्सा शागिर्द और हजरत ईशा अलैहिस्सलाम | का कहानी ,वाकिया 

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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम न वरुज अच्छा है ना जवाल अच्छा है मेरा मालिक मुझे जिस हाल में रखे वो हाल अच्छा है देखती आंखों सुनते कानो आप सब दोस्तों को साहेब खान का मोहब्बतों भरा सलाम मैं हूं साहेब खान और आप देख रहे हैं इस्लामिक मेसेजेज चैनल हजरत ईसा अलैहिस्सलाम अपने एक शागिर्द को साथ लेकर कीसी सफर पर निकले रास्ते में एक जगह रुके और शागिर्द से पूछा तुम्हारी जेब में कुछ है शागिर्द ने कहा मेरे पास दो देरहम हैं हजरत ईसा अलैहिस्सलाम ने अपनी जेब से एक देरहम निकाल कर उसे दिया और फरमाया यह 3 दिन हम हो जाएंगे करीब ही आबादी है तुम वहां से तीन दरहम के रोटियां ले आओ वो गया और तीन रोटीयं ली रास्ते में आते हुए सोचने लगा हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने तो एक दिरहम दिया था और 2 दिरहम मेरे थे जबकि रोटियां 3 हैं इनमें से आधी रोटियां हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम खाएऐंगे और आधी रोटियां मुझे मिलेंगी  बेहतर है कि मैं एक रोटी पहले खा लूं बहरेहाल उसने रास्ते में एक रोटी खा ली और दो रोटियां लेकर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के पास पहुंचा आप अलैहिस्सलाम ने एक रोटी खा ली और उससे पूछा 3 दिरहम की कितनी रोटियां मीली थी उसने कहा ऐ अल्लाह के नबी दो रोटियां मिली थी एक आपने खाए और एक मेंने खाली हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम वहां से रवाना हो गए रास्ते में एक दरिया आया शागिर्द ने हैरान होकर पूछा ए अल्लाह के नबी हम दरिया पार कैसे करेंगे जब के यहां तो कोई कश्ती नजर नहीं आती हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने फरमाया घबराओ मत मैं आगे चलूंगा तू मेरा दामन पकड़ कर मेरे पीछे चलते आना खुदा ने चाहा तो हम दरिया पार कर लेंगे चुनांचे हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने दरिया में कदम रखा और शागिर्द ने भी उनका दामन थाम लिया अल्लाह के हुक्म से आपने दरिया को इस तरह पार कर लिया की आप के पांव सुखे रह गए शागिर्द ने यह देखकर कहा मेरी हजारों जाने आप पर कुर्बान हो आप जैसा साहिबे एजाज नबी पहले माबोसी नहीं हुआ आप अलैहिस्सलाम ने फरमाया यह मोजेजा देख कर तेरे ईमान में कुछ इजाफा हुआ उसने कहा जी हां मेरा दिल नूर से भर गया है फिर आप अलैहिस्सलाम ने फरमाया अगर तुम्हारा दिल नूरानी हो चुका है तो बताओ रोटियां कितनी थी उसने कहा अल्लाह के नबी रोटियां बस दो ही थी फिर आप अलैहिस्सलाम वहां से आगे चले रास्ते में हीरनों का झुन्ड गुजर रहा था आप अलैहिस्सलाम ने एक हीरण को इशारा किया वो आप के पास चला आया आपने उसको जभा करके उसको गोश्त खाया और शागिर्द को भी खिलाया जब दोनों गोश्त खा चुके तो हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने उसकी खाल पर ठोकर मार कर कहा अल्लाह के हुक्म से जिंदा हो जा हीरन जिंदा हो गया और चील्लाता हुआ दूसरे हीरनों से जाकर दोबारा मिल गया शागिर्द यह मोजजा देख देख कर हैरान हो गया और कहने लगा अल्लाह का शुक्र है जिसने मुझे आप जैसा नबी और उस्ताद अता फ़रमाया हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने फरमाया यह मोजेजा देखकर तुम्हारे ईमान में कुछ इजाफा हुआ शागिर्द ने कहा कि अल्लाह के नबी मेरा ईमान पहले से दुगुना हो चुका है आप अलैहिस्सलाम ने फरमाया फिर बताओ रोटियां कितनी थी शागिर्द ने कहा है अल्लाह के नबी रोटियां बस दो ही थी दोनों हजरात रास्ते पर चलती गए  देखते हैं एक पहाड़ी के दामन में सोने की तीन ईंटे पड़ी है आप अलैहिस्सलाम ने फरमाया ऐ शागिर्द एक ईंट मेरी है और एक  तुम्हारी और तीसरी उस आदमी की है जिसने तीसरी रोटी खाई थी यह सुनकर शागिर्द शरमिन्दा से बोला हजरत तीसरी रोटी मैंने खाई थी हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम नहीं उस लालची शागिर्द को छोड़ दिया और फरमाया तीनों ईंटे तुम ले जाओ यह कह कर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम वहां से रवाना हो गए और लालची शागिर्द ईंटो के करीब बैठ कर सोचने लगा इन्हें कैसे घर ले जाया जाए इसी दौरान तीन डाकू वहां से गुजरे उन्होंने देखा एक शख्स के पास सोने की तीन ईंटे है उन्होंने उसे कत्ल कर दिया और आपस में कहने लगे ईंटे तीन है और हम भी तीन है लिहाजा हर शख्स के हिस्से में एक एक ईंट आएगी इत्तेफाक से तीनों डाकू भुखे थे उन्होंने एक साथी को पैसे दिए और कहा कि शहर करीब है तुम वहां से रोटियां लेकर आओ उसके बाद हम अपना अपना हिस्सा तक्सीम कर लेंगे वह आदमी रोटियां लेने गया और दिल में सोचने लगा अगर मैं रोटी में जहर मिला दीया तो दोनों  ही मर जाएंगे और तीनों इंटे मेरी हो जाएगी उधर उसके दोनों साथियों ने आपस में मशवरा किया अगर हम अपने साथी को मार दें तो हमारे हिस्से में डेढ़ डेढ़ ईंटे आएगी जब उनका तीसरा साथी जहर से भरी त्रोटियां लेकर आया दोनों ने फैसले के मुताबिक उस पर हमला करके उसको जान से मार दिया फिर जब उन्होंने रोटी खाई तो वह दोनों भी जहर की वजह से मर गए वापसी पर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम वहां से गुजरे तो देखा इंटे वैसी की वैसी रखी है जबकि

प्रेम कहानी यूसूफ अलैहिस्सलाम कि | जीवनी,वकिया part 3

 





  



      प्रेम कहानी यूसूफ अलैहिस्सलाम कि | जीवनी,वकिया part 3

युसूफ अपने गोदामों में गेहूं को पौधा समेत जमा लेता था यह कह कर के कि काहत के समयमवेशियों का भी चारे का जखीरा साथ-साथ हो जाएगा लेकिन माबुदे अमुन (शैतानी खुदा) के गोदामों में सिर्फ गेहूं का ही जखीरा करता था 5 साल के बाद यूसुफ का 5 गोदाम भर गया और सही सलामत था लेकिन शैतानी खुदा की गोदामों में जितने भी गेहूं के दाने रखे थे सब खराब व बर्बाद हो चुके थे यहां तक की जानवरों के खाने तक लायक नहीं था शैतानी खुदा को मानने वाले जादूगर 5 साल के बाद गोदाम खोला तो गेहूं के जगह कीड़े भरा हुआ था और सब गेहूं के दाने को खा चुका था सब सभी जादूगर ने एक मीटिंग किया और फैसला लिया कि रात के अंधेरे में सब गेहूं को नदी में बहा दिया जाए ताकि नागरिकों को पता ना चले क्योंकि अगर पता चल जाएगा तो जो भी बुत परस्ती पर विश्वास रखता था वह भी हमसे भाग जाएगा और हम लोग यूसुफ का मुकाबला नहीं कर पाएंगे आखिरकार जादूगर अजीम के हुकुम पर रात को सब गेहूं दरिया में फेंक रहा था इधर यूसुफ को पता चल गया था की काहेनाने आजिम की सारे के सारे गेहूं बर्बाद हो चुका है और इसको दरिया में फेंक सकता है इसको नागरिकों के सामने लाना है और सच्चाई जाहिर करना है युसूफ बिन मालिक को इनके पहरे में लगाता है और मालिक उनको रंगे हाथ पकड़ कर अगवान के सामने उनकी चालाकी दिखा देता है फिर सब आवाम उन्हें मारने को दौड़ता है लेकिन वह लोग वहां से भाग निकलता है इस तरह 7 साल बीतने के बाद कहत साली की शुरुआती रात में यूसुफ को पता चल जाता है की चाहत की निशानी बादशाह की बेतहाशा भूख से शुरू होगा बहरे हाल रात के 12:00 बजे युसूफ महल पहुंचता और सभी को बादशाह के लिए लजीज खाना बनाने को कहता है खाना तैयार होते होते बादशाह को अचानक पेट में दर्द आता है और वह बिस्तर से उठ कर बैठता है उसकी पत्नी बादशाह से पूछता है क्या बात है बादशाह कहता है मेरे भूख के मारे पेट में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है लेकिन इतनी रात को यह कैसा भूख है समझ नहीं पा रहा हूं तभी युसूफ वहां आ पहुंचता है और कहता है बादशाह सलामत आपके लिए खाना तैयार है बादशाह हैरान देखता रहता है और कहता है युसूफ तुम्हें कैसे पता चला युसूफ कहता है मेरे खुदा ने मुझे बताया काहात की शुरुआत इस रियासत के नागरिकों को रात में बेतहाशा भूख से शुरू होगा इसलिए मैंने पहले ही आकर आपके लिए खाना तैयार कर लिया बादशाही यूसुफ का बहुत ज्यादा शुक्रिया अदा करता है और कहता है या नबी ए खुदा मैं आपका बादशाह भी हूं और गुलाम भी तकरीबन 2 साल के बाद सभी के पास अनाज की किल्लत होने लगी और यूसुफ के शर्त के मुताबिक गोदाम से अनाज का बंटवारा शुरू कर दिया गया लेकिन बुत परस्ती के जितने भी पंडित थे उन सभी का भी गेहूं खत्म हो चुका था लेकिन वह यूसुफ के पास जाने में हिचकीचा रहे थे पंडितों के अजीम के कहने पर पंडितों ने गेहूं लाने के लिए युसूफ के गोदाम गए लेकिन उन्हें 3 गुना कीमत लेकर गेहूं दिया गया वह लोग वहां पर बहुत विरोध किया कि हम लोगों से 3 गुना कीमत क्यों लिया जा रहा है लेकिन उन सबके बातोंपर कोई भी सिपाही ध्यान नहीं देता है और वह लोग गेहूं लेकर चला जाता है फिर गेहूं खत्म होने के बाद फिर जाता है और इस बार बहुत ज्यादा विरोध करता है उनके विरोध करने पर युसूफ वहां पहुंचता है और कहता है आप लोग उस कीमत पर ले सकते हैं तो ले नहीं तो आपकी मर्जी वह लोग वहां से गुस्से में चल देता है फिर पंडितों के अजीम बादशाह के पास जाता है और यूसुफ का शिकायत करता है लेकिन बादशाह भी उसे वहां से फटकार कर भगा देता है तब वह लोग पड़ोसी रियासत से गेहूं लाने का सोचता है लेकिन वहां भी कहत साली से अनाज की किल्लत रहती है और गेहूं नहीं मिलता फिर गुस्से में आकर पंडितों के कुछ सिपाही भी रहते हैं उन सिपाही यूसुफ के गोदाम को लूटने का मंसूबा बनाता है और अचानक गोदाम में हमला कर देता है बहुत सारे सिपाही को जख्मी कर देता है लेकिन यूसुफ को पता चल जाता है युसूफ भी अपने सिपाही लेकर वहां पहुंच जाता है और उन लोगों के कुछ सिपाही पकड़े जाते हैं और कुछ भाग जाते हैं यह खबर सुनकर बादशाह गुस्से से लाल पीला होकर अपने सिपाही को हुकुम देता है कि जितने भी बुत हैं सब को तोड़ डालो और सभी पंडितों को पकड़कर ले आओ सिपाही जाता है और उन लोगों से मुकाबला करके उनके सारे सिपाही को मार देता है तब पंडित जो अलमारी में मूर्तियां रखी थी उसके सामने सब खड़े हो जाते हैं और कहता है कि हम हमारे खुदा को तोड़ने नहीं देंगे लेकिन बादशाह के सिपाह सलार नहीं मानता है और उसे तोड़ने के लिए आगे बढ़ता है उसी वक्त युसूफ सभी वहां आता है युसूफ को आते देख पंडितों के सर बरा यहां एक चालाकी दिखाता है और अचानक मूर्तियों वाली अलमीरा को बंद कर देता है फिर यूसुफ अलमीरा खोलता है लेकिन अलमारी मूर्तियां गायब हो जाता है तब सभी पंडित जोर-जोर से कहने लगता है कि हम लोगों का खुदा अब तुम लोगों से बदला लेगा यह माजरा देख सभी सिपाही घबरा जाता है और सोचता है कि हम लोगों ने गलती की है और हम लोगों को शैतानी खुदा जरूर सजा देगा क्योंकि उस रियासत का बादशाह से लेकर सभी सिपाही शैतान के पुजारी थे तभी युसूफ अलमारी के अंदर घुसता है तो अलमारी हिलने लगता है क्योंकि अलमारी में चक्का लगा होता है फिर यूसुफ नीचे आकर अलमारी को पीछे घास का देता है और अलमारी के नीचे जोर से फायर मारता है पैर मारते हैं वहां पर एक छेद हो जाता है फिर हाथ से उसे हटाने के बाद देखता है कि जो पंडित उस मूर्ति को पकड़े हुए उस गुफा में छिपा हुआ है सब युसूफ हंसने लगता है और कहता है देखो तुम्हारा खुदा ऊपर नहीं मिट्टी के नीचे चला गया है मिट्टी के नीचे से यह कैसे बदला लेगा यह माजरा देख सभी सिपाही बहुत गुस्से में आ जाता है और पंडितों को पकड़ कर मारने लगता है और कहता है तुम लोगों ने पूरे रियासत के आदमी को बेवकूफ बनाया और नकली खुदा के आड़ में अपना पेट पालते रहे तुम लोग इस तरह सभी को कारागार में कैद कर दिया फिर कुछ दिनों के बाद यूसुफ के पास खबर आता है की कैनान के 10 भाई मिस्र में दाखिल होना चाहता है वह लोग गेहूं लेने आए हैं और उन लोगों के साथ कुछ आदमी और हैं 10 भाई का जिक्र सुनते ही युसूफ कहता है मालिक आप जाएं और 10 भाई को बड़े ही अदब से मेरे यहां लेकर आए और कहे उन लोगों को कि आप मिस्र के अजीज का मेहमान है 10 भाई यह सुनकर अचंभित होता है और सोच में पड़ जाता है अंदर अंदर डरता भी है की अजीज का क्या मंसूबा है पता नहीं उन लोगों को लाकर मेहमान नवाजी करता है लेकिन अपना परिचय नहीं बताता और कहता है की तुम लोगों के परिवार में और कौन-कौन है वह लोग कहता है कि हमें गारा भाई हैं और एक बूढ़ा बाप है युसूफ कहता है तुम अपने उस भाई को क्यों नहीं लाए हो 1 हिस्सा गेहूं ज्यादा मिल जाता ठीक है अगली बार आओगे तो उसे भी साथ लाना नहीं तो तुम लोगों को गेहूं नहीं दिया जाएगा फिर उन लोगों को वहां से यह हूं दे कर भेज देता है और मलिक को कह कर उनके पैसे गेहूं के बोरे में वापस कर देता है प्यासा भाई गेहूं लेकर अपना घर पहुंचता है और सारा वाकया अपने बाप को बताता है यह वाक्या सुनकर याकूब अलैहिस्सलाम कहता है अजीज मिस्र का मंसूबा ठीक नहीं लग रहा और भी सोच में पड़ जाता है जब गेहूं के बोरे से वह पैसा मिलता है जो इन लोगों ने गेहूं की कीमत अदा किया था कुछ दिनों के बाद गेहूं खत्म हो जाता है फिर मिश्र जाने को यह लोग मजबूर होता है लेकिन मिस्र के अजीज के शर्त को अपने बाप को बताता है तो याकूब अलैहिस्सलाम कहता है कि मैं विनियामीन कोतुम लोगों के साथ हरगिज़ नहीं भेजूंगा तुम लोग जो युसूफ के साथ किए हो वह अभी तक मैं भुला नहीं पाया हूं सब सभी भाई कहता है अगर बिन यामीन को नहीं भेजेंगे तो अजीज मिस्र हम लोगों को गेहूं नहीं देगा यह उनका सर्त था इस हालत में हम लोग क्या करेंगे याकूब अली सलाम कहता है अगर तुम सब भाई अल्लाह से वादा करो कीबिन्यामीन को सही सलामत वापस लाएंगे यह सुनकर सभी भाई अपने बाप के हाथ में हाथ रख कर अल्लाह का कसम खाता है और कहता है अगर बिन्यामीन को वापस ना ला सके तो हम लोग भी वापस नहीं आएंगे अपनी जान से ज्यादा उनकी हिफाजत करेंगे इस वादा पर बिन्यामीन को उन लोगों के साथ मिस्र भेज देता है फिर सभी भाई मिस्र के लिए रवाना होता है उधर युसूफ अपने सिपाही को हुकुम दे रखा था की जब भी केनान के 11 भाई आए तो उन्हें इज्जत के साथ मेरे पास लेकर आए रवाना होने से पहले याकूब अलैहिस्सलाम अपने बेटे सबको एक नसीहत किया की अजीज मिस्र का मंसूबा ठीक नहीं है लिहाजा तुम लोग एक दरवाजे से मिस्र में दाखिल ना होना मिश्रा पहुंचकर सब अलग-अलग मत जाना अपने बाप की बात पर सभी 11 भाई अलग अलग हो जाता है और अलग-अलग दरवाजे से मिस्र में दाखिल होता है इधर युसूफ सिपाही से पूछता है क्या अभी तक नहीं आया है वह लोग सिपाही कहता है अभी तक नहीं फिर यूसुफ मलिक को कहता है मलिक अब तक तो वह लोगों को आ जाना चाहिए था आप मिस्र में उन लोगों को तलाश करें मलिक वैसा ही करता है और उन लोगों को खोजते खोजते आखिरकार गेहूं के गोदाम के बाहर सब भाई अलग-अलग लाइन में गेहूं लेने के लिए खड़ा रहता है लेकिन मलिक उन्हें पहचान लेता है और सबको इज्जत के साथ यूसुफ के पास ले आता है तब सभी भाई आपस में कहता है की चलो अल्लाह को यही चाहिए था कि हम लोग अजीज मिस्र के पास जाएं नहीं तो एहतियात करने के बावजूद हम लोग उनकी नजर में आ गए बाहर हाल यूसुफ के पास पहुंचकर सभी भाई को खाने के लिए दिया जाता है उन सबके साथ युसूफ भी बैठता है और कहता है आप सभी भाई अपने अपने मां के हिसाब से बैठे यानी जो भाई एक माता है वह एक साथ बैठे इस तरह 10 भाई तीन हिस्सों में बैठ जाता है लेकिन बिन्यामीन अकेला खड़ा रह जाता है तो यूसुफ पूछता है की तुम्हारा कोई भाई नहीं है बिन्यामीन कहता है मेरा एक भाई युसूफ था जो बचपन में हमसे बिछड़ गया युसूफ कहता है ठीक है तुम बुरा नहीं मानो तो मेरे साथ बैठ सकते हो इस तरह दोनों भाई चालाकी से एक जगह खाने को बैठता है और खाने के दौरान युसूफ अपना परिचय अपने भाई को बता देता है लेकिन यूसुफ कहता है कि सब्र रखो ताकि उन 10 भाइयों को अभी पता नहीं चले बिन्यामीन वैसा ही करता है फिर यूसुफ खाना खाकर वहां से अपने रूम में चला जाता है अंदर जाकर अपने बच्चे को भेजता है जाओ और कहो कि बिन्यामीन को पापा ने बुलाया है यह सुनकर सभी 10 भाई डर जाता है की बिन यामीन को अकेले अंदर क्यों बुलाया कहीं अजीज मिस्र का इरादा नापाक तो नहीं उधर यूसुफ अपने भाई से गले मिलता है और कहता है की अल्लाह का मर्जी है कि तुम भी यहां रुक जाओ बिन्यामीन कहता है अगर मैं यहां रुक जाऊं तो बाबा जुदाई सहन ना कर सकेगा युसूफ कहता है आप घबराएं नहीं अल्लाह की मर्जी है कि दोनों इस्माइल कि जब तक बाबा कुर्बानी नहीं देंगे तब तक उनकी मुलाकात दोनों इस्माइल से नहीं होगा बिन्यामीन कहता है ठीक है जैसा तुम चाहो तो यूसुफ कहता है अभी

प्रेम कहानी यूसूफ अलैहिस्सलाम कि | जीवनी,वकिया part 2

                        प्रेम कहानी यूसूफ अलैहिस्सलाम कि | जीवनी,वकिया part 2































कुछ दिनों के बाद उस कारागार में दो कैदी और भी था उसी रियासत एक बादशाह को शराब पिलाया करता था उसका नाम बनू था और दूसरा का नाम मुजलिस था जो बादशाह का खाना तैयार करता था एक रात दोनों सपना देखता है बानू देखता है कि उनके हाथ में दो अंगूर का गुच्छा थे उनको निचोड़ कर बादशाह को खिला रहे थे और मुजलिस देखता है कि उनके सर पर रोटी के तीन डब्बे थे और ऊपर के डिब्बे से परिंदे रोटी नोच नोच कर खा रहे थे जब सुबह हुआ दोनों बहुत परेशान था लेकिन दोनों से यूसुफ की दोस्ती हो गई थी जब युसूफ उसके पास पहुंचता है दोनों परेशान बैठा रहता है परेशान देख युसूफ पूछता है क्या बात है तुम दोनों बहुत ज्यादा परेशान नजर आते हो तब दोनों अपने अपने ख्वाब का जिक्र यूसुफ के सामने बयान करता है और कहता है समझ नहीं आता इसका मतलब क्या है युसूफ अलेह सलाम कहता है अगर मुझ पर भरोसा करो तो मैं इसका ताबीर बता सकता हूं बहरे हाल युसूफ अलैहिस्सलाम बनु को कहता है कि तुम्हारा ख्वाब का मतलब तुम्हें बादशाह माफ करके फिर से तुम्हें अपने पास रखेगा की और मजलिस को कहता है कि तुम्हारा ख्वाब का मतलब कि तुम्हें बादशाह सलामत चौराहे पर फांसी की सजा देगा और तुम्हें परिंदे नोच नोच कर खाएंगे थोड़ी देर के बाद बादशाह का फरमान आता है और दोनों कैदी को कारागार से बादशाह के सामने पेश करता है आखिरकार यूसुफ अलैहिस्सलाम की ख्वाब की ताबीर सही होता है और बिल्कुल वैसा ही होता है जो यूसुफ अलेही सलाम उस ख्वाब की ताबीर क्या थाबनू को बादशाह अपने पास रख लेता है और मुजलिस को चौराहे में फांसी का सजा दिया जाता है और उसे चिड़िया नोच नोच कर खाता है इधर जुलेखा यूसुफ के गम में पागल हो जाता है और कुछ ही दिन बाद जुलेखा के पति बादशाह की मौत हो जाती है फिर दूसरा बादशाह तैयार होता है और जुलेखा को महल से बाहर फेंक देता है जुलेखा पागल हालत में दरबदर भटकता रहता हैकुछ साल बाद बादशाह एक रात सपना देखता है कि सात मोटी तगड़ी गाय नील नदी से उठ कर चरने लगता है फिर सात पतली दुबली गाय नील नदी से उठ कर उन मोटी गायों को खा जाता है सुबह होते ही बादशाह परेशान रियासत के सभी जादूगर और बड़े बड़े पंडित को बुलाया और अपने सपना की ताबीर पुछा लेकिन सब नकाम रहे और कहा इसका कोई ताबीर नहीं लैकीन दुसरी रात फीर सपना देखता है की सात हरे भरे गेहूं का बलीया को सात सुखे बलि के गरमी से वह भी सुख जाता है फीर बादशाह परेशान जदुगर को बुलाता है और कहता है दोनों रात का सपना महज बेकार नहीं हो सकता इसका कीसी भी हलात में हमको ताबीर चहिए नहीं तो सबको करागार में डाल दूंगा सब जादुगर परेशान लेकिन कीसी भी जादूगर पंडित ताबीर बताने में नकाम रहा और बादशाह सबको करागर में डालने का हुक्म देता है तभी बनु जिसका ताबीर यूसुफ ने किया था बादशाह की बीबी को कहता है की मैं इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूं लेकिन बादशाह कि बीबी उसे फटकारता है लेकिन वह फिर कहता है मुझे एक मोका दीजिए बादशाह कि बीबी कहता है सोच लो अगर नहीं बता पाये तो मारे जाओगे कहता ठीक है तभी बादशाह कि बीबीकहता है रुक जाऐ और इन सबको झोड़ दे बनु कुछ कहना चाहता है फीर बादशाह जोर जोर से हंसते हैं और कहते हैं कि अब मेरा नोकर मेरे ख्वाब का ताबीर बताएंगे फीर बनू सेकहता है कि जल्दी बताओ बनू कहता है बादशाह सलामत मैं एक ऐसे शख्स को जानता हूं और मुझे याकीन है इसकी ताबीर वही बता सकता है जब मैं करागर में था तब मैं और मुजलीस ने सपना देखा था और इसका की भी ताबीर उन्होंने ही बताया था जो कि एक दम सही था उन्होंने कहा था कि मुझे माफ कर दिया जयेगा और मुजलीस को परीन्दे नोच खाऐंगे यह सून बादशाह कहता है जल्दी जाओ और मेरे ख्वाब का ताबीर ले आओ बादशाह की हुक्म से बनू करागर जाता है और यूसुफ से उस ख्वाब की ताबीर ले आता है और बादशाह के सामने पेश करता है की सात मोटी गाय और सात हरे भरे गेहूं की बलरी का मतलब सात साल तक अल्लाह की रहमत बरसेगी अगर पत्थर पर भी अनाज बोऐंगे तो होगा और सात पतली दुबले गाय मोटे तगड़े गाय को खाने का और सात गेहूं के बलरी सुख जाने का मतलब सात साल काहात का जमाना होगा इनसान और जानवर सब खाने को तरसेंगे यानी 7 साल रहमत का साल होगा और 7 साल काहत साली होगा बहरे हाल यह सुनकर बादशाह खुशी से झूम उठा और कहां यही मेरे ख्वाब की ताबीर है जाओ कारागार से यूसुफ को अभी लेकर आओ मैं उनसे मिलना चाहता हूं फिर बनो वहां से सिपाही के साथ कारागार का रुख करता है कारागार पहुंचकर यूसुफ को कहता है तुम्हारे ताबीर से बादशाह बहुत खुश है और तुम्हें आजाद कर दिया है लेकिन यूसुफ कहता है क्या आप जाओ और बादशाह से कहें कि मेरे ऊपर जो इल्जाम है मैं उसको मिटाए बगैर कारागार से नहीं जाऊंगा और कहना कि आप थोड़ा सा मालूम करें कि आपके रियासत में औरतों का हाथ का उंगली काटने का माजरा क्या था इसी से मेरा बेगुनाही साबित हो जाएगा बनो वैसा ही करता है बादशाह को जाकर कहता है कि यूसुफ ने यह शर्त रखी है फिर बादशाह हंसने लगता है कि यह कैसा इंसान है बादशाह के आजाद करने पर भी कारागार से निकलना नहीं चाहता ठीक है मैं इसका पता लगाता हूं और सिपाहियों को हुकुम देता है कि जो सब औरत जुलेखा के दावत में शरीक था सब को हाजिर किया जाए सिपाही सब को पकड़ कर यहां तक कि जुलेखा को भी पकड़ कर बादशाह के सामने पेश किया जाता है बादशाह उन औरतों से पूछता है उंगली काटने का माजरा क्या है लेकिन सब औरत चुप रहता है फिर बादशाह जुलेखा को कहता है बताओ जुलेखा क्या माजरा था तो जुलेखा सारी सच्चाई बोलने पर मजबूर हो जाता है और यूसुफ की सच्चाई का गवाही उन सब औरतों में भी बादशाह के सामने रख दिया फिर बादशाह सभी औरतों को बंधक बनाने का हुक्म देता है फिर वनों को सिपाही के साथ यह सब को लाने भेजता है बनो कारागार पहुंचता है और यूसुफ को यह खबर देता है कि तुम बेगुनाह हो तुम पर लगे इल्जाम पूरे रियासत के सामने तुम पर से हटा दिया गया है और उन सब औरतों को कैद कर लिया गया है बादशाह तुमसे मिलने को बेकरार है जल्दी चलें फिर वहां से यूसुफ चल पड़ता है महल पहुंचने के बाद युसूफ कहता है मेरा कपड़ा गंदा है मैं थोड़ा फ्रेश हो जाऊं तब बादशाह से मुलाकात करेंगे थोड़ी देर के बाद बादशाह के हाजिर होता है लेकिन अपना सर नहीं झुकाते क्योंकि अल्लाह के अलावा किसी के सामने सर नहीं झुकाना चाहिए फिर बादशाह को याद आता है जब बादशाह बच्चा था युसूफ भी बच्चा था तभी यूसुफ को महल में देखा था उस वक्त भी सर नहीं झुकाया था लेकिन तभी उसे बच्चा समझ कर उस वक्त का बादशाह कुछ नहीं कहा था फिर बादशाह यूसुफ को कहता है कि तुम्हें याद है जब तुम बच्चे थे तुम्हें महल में देखा था मैं तब भी तुम सर नहीं झुकाया था और आज भी नहीं वही तेवर है तुम्हारा युसूफ कहता है मैं सिर्फ एक खुदा पर भरोसा करता हूं और उसी का पूजा करता हूं उसके अलावा किसी के सामने सर झुकाना जायज नहीं बादशाह कहता है ठीक है मेरे ख्वाब की ताबीर तो तुमने बता दिया इसका उपाय भी बताएं कि कैसे उस काहत साली से निजात पा सके युसूफ कहता है बादशाह सलामत आने वाली 7 साल ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके अनाज उगाया जाए और उसे जखीरा कर लिया जाए ताकि कहत की 7 सालों में उस जखीरे से गुजारा हो जाए तब बादशाह कहता है बहुत खूब इसके लिए हमें तुम्हें अपना वजीर मंत्र कब करता हूं जैसा मुनासिब हो तुम करोतब यूसुफ बादशाह का शुक्रीया करता है और कहता है कि मेरा आप से एक गुजारिश है कि उन औरतों को छोड़ दिया जाए और करागार मे जो कैदी है उसे भी रीहा कर दिया जाए बादशाह कहता है औरतों को माफ करके तुम मेरे नजर में और महान हो गए हो लेकिन कैदियों को लेकर मैं कुछ समझा नहीं खतरनाक कैदियों को कैसे रिहा किया जाए तब युसूफ कहता है अब वाह कैदी सुधर गए हैं उनका जिम्मा मैं लेता हूं तो बादशाह कहता है ठीक है जैसा तुम चाहो तभी बादशाह का मां कहता है कि तुम पागल हो गए हो एक तो रियासत को अजनबी के हाथों सौंप दिया फिर उन खतरनाक कैदी को रेहा करने की बात करते हो बादशाह कहता है मां आप चुप रहे फिर युसूफ कारागार जाता है और सभी कैदियों को रिहा कर देता है फिर सभी कैदियों को कहता है कि देखो मैं अपने जिम में से तुम लोगों को रिहा करवाया हूं मुझे शर्मिंदगी करने का मौका ना दें तब सभी कैदी कहता है की आप जो कहेंगे वही करेंगे और हम लोग आपको छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे फिर वहां पर अचानक मालिक पहुंचता है जो यूसुफ को मिस्र लाकर बेचा था मालिक युसूफ से अपनी माफी का तलब गार करता है और कहता है मैंने आपके साथ बहुत गलत किया है मुझे माफ कर दे तब यूसुफ कहता है मैं आपको तभी से ही माफी दे चुका हूं बाहरी हाल आप यहां पर क्या कर रहे हैं मालिक कहता है मैंने आपको खोजते खोजते  सब कुछ खो चुका हूं मेरे पास कुछ भी नहीं है अब मैं आपका गुलाम बन कर रहूंगा तब यूसुफ कहता है ठीक है हमें मिलकर एक बहुत जरूरी काम करना है जो मुझे बादशाह ने सौंपा है मुझे 7 साल का गेहूं जखीरा करने के लिए 7 गोदाम बनाना है उसमें आप सभी की जरूरत है तो चले आज से ही इस काम को अंजाम दे इस तरह युसूफ गोदाम की तामीर करना शुरू कर देता है फिर पूरे रियासत में एलान किया जाता है आप लोग ज्यादा से ज्यादा खेती करें और अनाज को सरकारी गोदाम में जमा करें जो फ्री में अनाज जमा करेगा उसे कहत साली में फ्री में अनाज दिया जाएगा और जो कीमत लेकर अनाज जमा कराएगा उसे काहाथ साली के समय कीमत देकर अनाज दिया जाएगा और जो शहरी और अमीर है उसे डबल कीमत पर अनाज मुहैया कराया जाएगा लेकिन शैतान की पूजा करने वाले नागरिकों को भड़काता है और कहता है एक अजनबी पर भरोसा मत करो वह तुम सबको कुछ नहीं देगा आप सब माबुदे आमुन(यानी शैतानी खुदा) की गोदामों में अनाज जमा करें लेकिन मिस्र के 80 फीसद नागरिक यूसुफ के गोदामों में अनाज जमा करता है क्योंकि कहतसाली का ताबीर यूसुफ ने बताया था

प्रेम कहानी यूसूफ अलैहिस्सलाम कि|जीवनी,वकिया part 1


 प्रेम कहानी यूसूफ अलैहिस्सलाम कि|जीवनी,वकिया part 1 

यूसुफ अलैहिस्सलाम का परिवार :•••••

युसूफ अलैहिस्सलाम का पीता याकूब अलैहिस्सलाम का पीता इसहाक अलैहिस्सलाम का पीता ईब्राहीम अलैहिस्सलाम हैं याकूब अलैहिस्सलाम के 12 बेटे यानी युसूफअलैहिस्सलाम के 11 भाई थे और याकूब अलैहिस्सलाम के भाई और याकूब अलैहिस्सलाम के 12 बेटों में सबसे प्यारा यूसुफ़ अलैहिस्सलाम थे और यूसुफ़ भाइयों में सबसे छोटे थे एक रात को यूसुफ़ अलैहिस्सलाम सपना देखा की चाँद सितारे सब उसको सलाम कर रहा है सुबह होते ही यह वाकिया अपने पिता  को बताते हैं यह सुनकर याकूब अलैहिस्सलाम अपने बेटे को अकेले एक कमरा में  लेजाता और कहता है बेटे इसका जिक्र तुम अपने भाइयों के सामने कभी मत करना लेकिन यूसुफ अलैहिस्सलाम के बड़े बेटे चुपके से यह बात सुन लेता है लेकिन पूरी बात समझ नहीं आता दूसरे दिन सब भाई मिलकर अपने पिता से कहता है कि हम लोगों के साथ यूसुफ को भी बकरियां चराने भेजिए वह हमारे छोटे भाई हैं हम सब इसका बहुत अच्छे से ख्याल रखेंगे बहुत जिद करने के बाद आखिरकार याकूब अलैहिस्सलाम अपने बेटे के बातों को मानकर उन सब के साथ भेज देता है जाने के समय सभी भाई युसूफ से बहुत प्यार भरा बातें करता है जैसे ही मैदान पहुंचता है बकरियों को चरने के लिए छोड़ देता है और सब भाई एक जगह बैठ कर युसूफ से वह बात पूछता है की तुम्हें पिताजी ने रूम में क्या पूछ रहा था लेकिन यूसुफ अलैहिस्सलाम कहता है कुछ नहीं वैसे ही बातें कर रहा था लेकिन सब भाई उसको बहुत प्यार से पूछता है और जिद करने लगता है आखिरकार छोटे बच्चे भाइयों की बात पर बहक जाता है और सपने वाली बात कह देता है यह बात सुनकर युसूफ को एक जगह बैठा देता है फिर थोड़ी दूर जाकर सब भाई आपस में मशवरा करता है की युसूफ तो पैगंबर बनने वाला है पिताजी इसीलिए हम लोगों से मोहब्बत नहीं करता सब यूसुफ को ही मोहब्बत करता है सब युसूफ का ही गलती है अगर यूसुफ को मार दिया जाए तो हम लोगों का रास्ता साफ हो जाएगा लेकिन यूसुफ का एक अपना भाई भी था वह कहता है नहीं नहीं बाबा बहुत दुखी होंगे ऐसा नहीं करना है लेकिन यूसुफ के सौतेले भाई सब नहीं मानता है और उसको भी अपने बातों में उलझा देता है आखिरकार फैसला होता है की यूसुफ को मारना नहीं है उसे इस सूखे कुएं में डाल दो कोई मुसाफिर आएगा तो इसे अपने साथ गुलाम बना कर ले जाएगा यह दूसरा देश चला जाएगा और हम लोगों का रास्ता भी साफ हो जाएगा सब भाई मिलकर यूसुफ को चकमा देकर उस कुएं में गिरा देता है और उसके कपड़े को एक बकरी को मार कर उसके खून से यूसुफ के कपड़े को रंग देता है और शाम को घर वापस लौटता है उधर याकूब अलैहिस्सलाम यूसुफ को भेजकर परेशान था और हमेशा रास्ते की तरफ देखता कि कब आएगा जब सब बच्चे बकरियां लेकर घर वापस आ गए तो याकूब अलैहिस्सलाम पूछता है कि यूसुफ कहां है सब भाई मिलकर जोर-जोर से रोने लगता है और कहता है बाबा यूसुफ को एक जगह बैठा कर हम लोग बकरियां चरा रहे थे और उसको कहे थे की इस जगह से कहीं नहीं जाना लेकिन वह पहाड़ के तरफ चला गया था तो उस पर भेड़िया ने हमला कर दिया और उसे मार डाला यह कपड़ा यूसुफ का है देख लीजिए यह सुनकर याकूब अलैहिस्सलाम को बहुत जोर का सदमा पहुंचता है और कहता है नहीं नहीं युसूफ नहीं मर सकता यह धोखा है यह कह कर सबर कर लेता है और सब अल्लाह पर छोड़ देता है उधर युसूफ अकेले अंधेरे कुएं में रो रहे थे बहुत जोर का भूख भी लगा था तो उन्होंने अल्लाह को याद किया और अल्लाह की हुकुम से उस कुएं में फरिश्ते की मदद से खाना और रोशनी पहुंचाता है और फरिश्ते को हुक्म देता है की यूसुफ को उस कुएं में अकेले मत छोड़ना उसके साथ रहना इस तरह 2 दिन बीत गए 2 दिन के बादसौदागर का काफिला वहां पर आकर रुकी रुकने के बाद पानी के लिए उस कुएं में बाल्टी को रस्सी बांधकर उतारा जैसे ही बाल्टी नीचे गया यूसुफ ने उस बाल्टी के अंदर घुस गया बाहर से यह लोग रस्सी खींच रहे थे लेकिन बहुत भारी था सब मिलकर रस्सी खींचा और ऊपर उठाया तो बाल्टी में पानी के जगह एक खूबसूरत बच्चा मिला उस काफिले के मालिक ने इस बच्चे से अपना नाम पता पूछा लेकिन यूसुफ यहां पर सोच में पड़ गया और थोड़ी देर सोचने के बाद बोला कि मेरा कोई माता-पिता नहीं है और मैं इस कुएं में पानी निकलने आया था लेकिन इसमें गिर गए यह सुनकर काफिले के मालिक बहुत खुश हुई और कहां चलो अल्लाह ने फ्री में एक गुलाम दिया है इसे भी बाजार जा कर बेच डालूंगा फिर काफिले वहां से रवाना हुआ यूसुफ को भी हाथ बांधकर एक घोड़े में बिठाया और वहां से चलता बना अपना देश पहुंचकर उस सौदागर ने गुलाम के बाजार में यूसुफ को ले गया और उसकी कीमत 10 दिनार रखा युसूफ देखने में बहुत ही सुंदर था उस बाजार में वहां का बादशाह भी मौजूद था बादशाह जैसे ही युसूफ को देखा उसे पसंद आ गया और जाकर उसका कीमत पूछा सौदागर ने उसका कीमत 10 दीनार बताया लेकिन बादशाह ने उसे 15 दिनार में खरीदा और अपने साथ महल ले गया युसूफ को देख बादशाह की पत्नी जुलेखा को भी बहुत पसंद आया और उसको अपने साथ रखने के लिए बादशाह से उसे ले लिया इस तरह युसूफ महल में बड़ा हुआयूसुफ अलैहिस्सलाम जब जवान  हुए तो उस की खूबसरती देख बादशाह का बीबी उस पर फीदा हो गया क्यों न हो अल्लाह ताला यूसुफ को इतना खुबसूरत पैदा कीया की रहती दुनिया तक एक मिशाल बन गया। यूसुफ अलैहिस्सलाम बादशाह की बीबी जुलेखा का गुलाम था यूसुफ की खूबसूरती से फीदा यूसुफ को जीना के लीए मजबूर करता लेकिन यूसुफ अलैहिस्सलाम अल्लाह कीकी डर और यूसुफ की परहेज गारी उसे वहां से भागने पर मजबूर कर देता है इस बात की खबर पूरे रियासत में हवा की तरह फैल जाता है की रानी यूसुफ का दीवाना है यह सुनकर बादशाह अपनी रानी से पूछता है क्या मैं सुन रहा हूं पुरानी कहता है यह सब गलत बात है मुझे बदनाम करने के लिए यह सब बात कर रही है फिर रानी का सहेली सब यह बात सुनकर रानी के पास आता है और पूछता है क्या तुम एक नौकर की प्रेम में पागल हो कैसे या हो सकता है कि तुम्हें नौकर के प्यार में अंधी हो गई है अपने इज्जत का भी ख्याल नहीं किया तो दौरानी कहता है अपनी सहेलियों से कि तुम लोग ऐसे नहीं समझोगे कल सुबह में तो हम लोगों को दावत पर बुला लूंगा सब आ जाना आखिर रानी वैसा ही करता है सब सहेलियों को दावत पर बुलाता है और सबके सामने एक सेब और एक चाकू रखता है उसके बाद यूसुफ को रानी साहिबा हुक्म देता है कि तुम मेरे मेहमान के सामने जाकर खड़े हो जाओ जैसे ही युसूफ उस कमरे में दाखिल होता है उसी समय रानी सभी सहेलियों को सेब काटने को कहता है सब औरत ऐसा ही करता है जैसे ही सब अपने हाथ में चाकू और सेब पकड़ता है उसी वक्त यूसुफ को उस कमरे में ले आता है युसूफ को देख सभी औरत युसूफ की तरफ देखने लगता है और देखते ही रहता है यहां तक कि सब औरत सेब के जगह अपनी उंगलियां काट डालता है और पता ही नहीं चलता उसकी तरफ देखते रहता है ऐसा देख रानी युसूफ को वहां से वापस भेज देता है तब सभी औरत अपनी हाथों की तरफ देखता है सबका उंगली कटा हुआ तब रानी कहता है अब तुम लोग समझे मैं क्यों इस पर पागल हूं इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं यूसुफ अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने कितना खूबसूरत बनाया था ऐसा करते करते रानी आखिर थक कर एक योजना बनाता है और एक घर तामीर करता है उस घर में एक के बाद एक सात दरवाजा होता है 7 दरवाजे के बाद रानी का बिस्तर लगा रहता है फिर रानी एक नौकर को कहता है की जाओ और यूसुफ को कहो की रानी ने तुम्हें बुलाया है और जैसे ही वह मेरे पास आए पीछे से तुम सातों दरवाजे को बंद कर देना नौकर ऐसा ही करता है जब युसूफ रानी के बिस्तर तक पहुंचता है तो वह नौकर सभी दरवाजे में लॉक लगा देता है फिर अंदर रानी जुलेखा कहता है युसूफ से कि मुझसे प्यार करो नहीं तो मैं चीलाऊंगी और तुम्हें सजा दिलवा दूंगा लेकिन यूसुफ नहीं मानता है तब जुलेखा उसे जबरदस्ती पकड़ लेता है लेकिन यूसुफ किसी तरह उससे बचकर दरवाजे के पास आता है और अल्लाह से दुआ करता है या अल्लाह मुझे इस गंदी चीज से बचा ले मुझे जीना से बचा ले और यूसुफ का दुआ उसी वक्त कुबूल होता है और एक के बाद एक सभी सातों दरवाजा अपने आप खुल जाता है फिर रानी जाकर बादशाह से यूसुफ का शिकायत करता है की यूसुफ ने मुझसे बदतमीजी की है और मुझसे जिना करने की कोशिश की है यह सुनकर बादशाह यूसुफ को बुलाता है और यूसुफ को अपनी सफाई पेश करने का मौका देता है लेकिन यूसुफ चुपचाप खड़ा रहता है यह देखकर बादशाह उसे उम्र कैद की सजा सुनाती है उसके बाद यूसुफ को उस रियासत का कारागार भेज देता है

कोरोना को लेकर चेतावनी | स्टेज 2 किया है आइये जानते हैं


 कोरोना को लेकर चेतावनी | स्टेज 2 किया है आइये जानते हैं   

कोरोना को लेकरआपके मन के हर सवाल का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं हम इस वीडियो में उससे पहले मेरे चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए और वीडियो पसंद आए तो शेयर जरूर कीजिएगा पहले बता देते हैं कि कोरोनावायरस वैश्विक महामारी है जो दुनिया के सारे देश में फैला है और इस वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचा रखा है या वायरस मानव प्रजाति के लिए बहुत ही खतरनाक है जानलेवा है इसने न केवल मानव जाति को नुकसान पहुंचाया बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया अब तक के इतिहास में यह वायरस सबसे ज्यादा नुकसानदायक साबित हुआ है इस वायरस के सामने डब्लू एच ओ जैसे संस्था भी घुटने टेक चुके हैं डब्ल्यूएचओ का फुल फॉर्म world health organization और देश की स्कूल कॉलेज सभी बंद है और धीरे-धीरे क्या हम भागने का नाम नहीं ले रहा है पूरी दुनिया में अपना अटैक और भी बढ़ रहा है कोरोनावायरस यह एक ऐसा वायरस है जो डॉक्टर तक को नहीं छोड़ता जो डॉक्टर इलाज करते हैं इलाज के दौरान वह भी संक्रमित हो जाते हैं तो फिर आप अनुमान लगा सकते हैं की यह वायरस कितना खतरनाक है और मनुष्य के लिए कितना जानलेवा है 

जब यह वायरस पहला पायदान पर था तो इसकी अटैक कुछ कम थी लेकिन जैसे ही यह वायरस दूसरे स्थान पर पहुंचा यह बहुत ही घातक से इंसान पर अटैक करता है और इंसान को मौत के घाट उतार देता है 

पहला स्थान और दूसरा स्थान में क्या फर्क है इसे जान लेः

 जब वायरस फर्स्ट स्टेज में था तो उसका लक्षण गले में खराश आना नाक बहना सर दर्द जैसी लक्षण थी और सांस फूलना लेकिन जैसे ही या वायरस दूसरे स्टेज में आया तो इसका लक्षण बहुत ज्यादा आने लगा जैसे पेट दर्द हाजमा खराब होना डायरिया के साथ उल्टियां होना भूख ना लगना कमजोरी के साथ आंख में पानी आना धुंधलापन देखना और हार्ट अटैक और पूरी तरह ऑक्सीजन लेवल घट जाना सबसे ज्यादा खतरा इंसान को इसी से हुआ यानी ऑक्सीजन लेवल के घटना जैसी गंभीर लक्षण आने लगा इस वायरस ने पहला स्टेज से दूसरे स्टेट में इंसानी जीवन को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया पहले स्टेज के मुकाबले दूसरे स्टेज में संक्रमण तो कम हुआ लेकिन मौतें पहले स्टेज के मुकाबले तीन से चार गुनी तक ज्यादा हुई और अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण भी कुछ ज्यादा मोतें हुई

Q1. क्या covid 19 वैक्सीन के लिए रजिस्टर कर सकता हूँ ?

ans.  हाँ [covin] web पोर्टल में लॉगिन कर के और इस web लिंक पर क्लिक करके www.cowin.gov.in sign in your self पर vaccin के लिए कर सकते हैं 


Q2. क्या मोबाइल एप्प से वैक्सीन के लिए रजिस्टर कर सकते हैं ?

ans2.  भारत में [covid vaccination] के लिए मोबाइल aplication पर नहीं कर सकते [register] इसे सरकार द्वारा स्वीकृत नहीं दिया गया है आप सिर्फ cowin पोर्टल पर ही register कर सकते हैं 

Q3.  COVID 19 नाम किसने जारी क्या ?

ANS3.. COVID 19 नाम  WHO दुवारा जारी क्या गया 11 फरवरी 2020 को 


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कोरोना की वजह से आईपीएल 2021 आस्थगित समाचार | IPL 2021 NEWS LIVE


आईपीएल 2021 समाचार, | IPL 2021 NEWS LIVE,
आईपीएल 2021 समाचार, मैच, जिओ फोन, लाइव [How to Watch Free Live IPL Match 2021News ] (Kaise Dekhen, Watching Apps, Live Match, on Mobile, PC, Hotstar, Video, in Hindi)


 IPL 2021 रद्द:
BCCI, टीमों को 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है बीसीसीआई औसतन हर मैच के प्रसारण से 67 करोड़ रुपये कमाता है। इसने 2020 में आईपीएल से 4,000 करोड़ रुपये कमाए और इस बार भी इसी तरह की कमाई की उम्मीद थी /अतः IPL की पूरी जानकारी के लिए इस लेख को अंत तक पढ़े ताकि आप को सही जानकारी मिल सके 
 

                                                                   


इंडियन प्रीमियर लीग भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने मंगलवार को इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2021 को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया क्योंकि कुछ खिलाड़ियों और विभिन्न फ्रेंचाइजी स्टाफ ने covid के परीक्षण किया और Positive पाए गए । लीग को रद्द करना, बीसीसीआई के लिए सबसे बड़ा पैसा स्पिनर है, जो बदले में आईपीएल टीमों के वित्त में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, यह दोनों के लिए एक बड़ा वित्तीय झटका हो सकता है। BCCI, के अनुसार, 2020 में आईपीएल से 4,000 करोड़ रुपये कमाए, जब की  यह टूर्नामेंट संयुक्त अरब अमीरात (UAE ) में दर्शक की उपस्थिति के बिना आयोजित किया गया था। आईपीएल 2021, जो की ऑनलाइन और बिना दर्शकों के प्रसारण मंच पर संपन्न होने वाली थी , बीसीसीआई के लिए समान राशि लाने की उम्मीद थी। बीसीसीआई औसतन हर मैच के प्रसारण से 67 करोड़ रुपये कमाता है। हालांकि, 60 मैचों के टूर्नामेंट में 31 मैच खेले जाने बाकी हैं, लेकिन बीसीसीआई आधे से अधिक नुकसान के साथ घूम रहा है। लेकिन ख़ुशी की बात यह है की आधे टूर्नामेंट होने की वजह से BCCI को 4,000 करोड़ की जगह 2000 करोड़ का नुकशान हुवा यानि नुकशान आधे पर गया | भारत के क्रिकेट बोर्ड को 2000 करोड़ का यह झटका आईपीएल फ्रेंचाइजी के लिए बुरी खबर भी लग सकता है। क्योंकि आधे टूर्नामेंट को रद्द कर दिया गया है, बीसीसीआई द्वारा आईपीएल से प्राप्त आय को केंद्रीय रिजर्व पूल में स्थानांतरित किया जाता उम्मीद कर रहे थे। अभी भी आधे टूर्नामेंट के साथ, आठ टीमों को केंद्रीय रिजर्व पूल में कमाई का  कम से कम 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। आईपीएल फ्रेंचाइजी के लिए चिंता का एक अन्य प्रमुख कारण विभिन्न कंपनियों के साथ उनका प्रायोजन अनुबंध था। प्रत्येक आईपीएल फ्रैंचाइज़ी अपनी स्टार पावर और लोकप्रियता के अनुसार, टीम की जर्सी पर अपना नाम प्रदर्शित करने के लिए प्रायोजकों से कई करोड़ रुपये प्राप्त करती है। टीमें कथित तौर पर एकल-अंक करोड़ों से 40 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित करती हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रायोजक लोगो को टीम की जर्सी या खिलाड़ियों के उपकरण पर रखा गया है।

 यदि प्रायोजक अपने-अपने समझौतों में तैयार हो जाते हैं, तो सभी टीमें उस राजस्व का आधा हिस्सा समाप्त कर सकती थीं। बीसीसीआई कथित तौर पर इन प्रायोजकों से हर साल लगभग 800 करोड़ रुपये कमाता है। 
आईपीएल के अध्यक्ष बृजेश पटेल बीसीसीआई खुद को VIVO जैसे टाइटल स्पॉन्सर और PAYTM , TATA , DREAM 11 ,Unacademy और अन्य सह-प्रायोजकों जैसे ने केवल आधे टूर्नामेंट के लिए भुगतान करने का निर्णय लिया है । बीसीसीआई के सचिव Jay Shah और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने अभी भी इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी है कि शेष टूर्नामेंट को वर्ष के आखिर में फिर से शुरू किया जाएगा या नहीं । 
 

                                            

 कई आईपीएल खिलाड़ियों और कर्मचारियों ने जैव सुरक्षा बुलबुले में होने के बावजूद परीक्षण किया और सकारात्मक पाया गया। संक्रमित लोगों में स्पिनर अमित मिश्रा, विकेटकीपर रिद्धिमान साहा और चेन्नई सुपर किंग्स के कोच लक्ष्मीपति बालाजी शामिल हैं। इन सभी खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया है। जब आईपीएल का वर्तमान सीजन शुरू हुआ, देश में लगभग 600 लोग कोविड से मर रहे थे। टूर्नामेंट के बिच के समय, भारत की दैनिक मृत्यु एक दिन में 3,500 से अधिक हो गई थी।इसी कारन वश IPL 2021 को बिच में आस्थगित करना पड़ा

younus,alaihissalam,ki kahani/history of younus alayhissalalm,


younus,alaihissalam,ki kahani/history of


younus alayhissalalm,

 अज़ीज़ दोस्तो, हज़रत यूनुस (अलैहि सलाम) को अल्लाह तआला ने क़ौम निनवा की तरफ़ भेजा जो की क़दीम बाबल शहर के पास का एक शहर था  यूनुस (अलैयहे सलाम) का ज़माना ईसा (अलैयहीस सलाम) से तिक्रीबान 800 साल पहले का है।  ये क़ौम भी बूत परस्त थी और उन्होंने लगभग 1,00,000 बनी इसरायल को क़ैद कर के राखा था  यूनुस (अलैहीस सलाम) ने 7 साल तक हक की दावत दी यानि की तबलीग की  लेकिन जब उनकी कोम पर इस दावत हक का असर ना हुवा और वोह अपनी बूत परस्ति मी लागे रहे तो यूनुस (अलैहिस सलाम) ने आखीर मे अल्लाह ता'अला के आजाब की धमकी दे दी, उन्की कौम ने फिर भी परवाह नहीं की
जब अज़ाब का मुक़र्रर्रह वक़्त क़रीब आ गया और आज़ाब के आसार नाज़र ना आए  तो यूनुस (अलैहीस सलाम) अल्लाह तआला की इजाजत के बगैर ही अपनी क़ौम को छोड़ कर चले गए। जैसे ही यूनुस (अलैहीस सलाम) झोड़ कर चले गये  तो उनकी कौम पर अजाब का असर नजर आने लगे, काले काले बादल छा गये घने काले धुआं उनकी तरफ बढ़ने लगे क़ौम ने यूनुस (अलैहीस सलाम) को तलशना शूरु कीया लेकिन वो नहि मिले तो उनकी कौम खूद ही अपनी बीबी बच्चों और जानवरों के साथ एक मैदान में जमा हो गये और अल्लाह ताला के बारगाह में रो रो कर अपनी गुनाहों की माफी मांगने लगे  तोअल्लाह ताअला न उन्न पर से आजाब को टाल दिया
 कीसी भी कफीर कौम की इतिहास में और अल्लाह ताला की सुन्नत जरीया में पहली मिशाल है कि आजाब देखने के बाद ईमान लाना फैदामन्द साबित हुआ हो नहीं तो अल्लाह तआला की सुन्नत या तरिका येहि है की एक बार आजाब का वक़्त मुकर्रर हो जाए तो फिर टालता नहींयूनुस (अलैहीस सलाम) आपनी कौम से दुर चले गये  लेकिन वो अते-जते मुसाफ़िर से आपना क़ौम का हाल दरियाफ्त करते।  जब उन्हे मालूम हुवा के अल्लाह तआला उनकी कौम पर से आजाब टाल दिया है तो भी वो वपस नही गाये।  क्योंकि उनकी  कौम ने उनको झुटलाया था।  इसीलिए उनकी ग्यरत ने  गंवारा ना किया के वो वपस जाए

 • मझली के पेट का सफर:

शादी/shadi karna kaisa hai islam ki najar me

 शादी/shadi karna kaisa hai islam ki najar me
 शादी करना सुन्नत है और इस्लाम का एक हिस्सा है इसलिए हर इंसान को शादी करना चाहिए बगैर किसी जाईज वजह के अगर कोई शादी नहीं कर रहा  तो यह इस्लाम के खिलाफ है जिन लोगों की शादी होने वाली होती है उनमें से बहुत से लोगों के दिमाग में कुछ सवाल होते हैं कि इस्लाम के हिसाब से शादी के बाद भी पहली रात को क्या करना चाहिए क्या इसका सही तरीका है हम यहां पहले रात की कुछ बात करेंगे लेकिन यह बात सिर्फ इस्लाम सीखने की नियत से पढ़िए दिल में कुछ गंदगी ना रखें और ना कोई गलत कमेंट करना हमारा मकसद सिर्फ उन लोगों को इस्लाम का तरीका बताना है जिनको इस बारे में मालूम कम है शादी के बाद जब लड़का रूम में जाए तो सबसे पहले सलाम करें खैरियत मालूम करें और थोड़ी बात करने के बाद लड़की की पेशानी के बाल सीधे हाथ आहिस्ता से पकड़िए और यह दुआ करें हदीस देखिए हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया जब कोई शख्स निकाह करें और पहली रात को अपनी दुल्हन के पास जाए तो नरमी के साथ उसकी पेशानी के थोड़े से बाल अपने सीधे हाथ में लेकर यह दुआ पढ़े अल्लाहुम्मा इन्नी अश अलुका मीन खैरीहा व खैरी मा फीहा व खैरी मा जबलताहाअलय वाउधु बीका मीन सर्रेहा व सरर्री मा फीहा व सर्री म जबलताहा अलैह,

 तर्जुमाः....





ऐ अल्लाह मैं तुझसे इसकी(अपनी बीबी की) भलाई और खैरो बरकत मांगता हूं और उसकी फीत्री आदतों की भलाई और तेरी पनाह चाहता हूं उसकी बुराई और फीत्री आदतों की बुराई से

पेशानी का बाल पकड़ने से पहले अपनी बीवी को यह बता सकते हैं कि यह हमारे रसूल का हुक्म है वरना जिस लड़की को नहीं मालूम हो वाह कुछ गलत ना सोचने लगे इसके बाद अगर वजू ना हो तो वजू कर लीजिए और 2 रकात नमाज पढ़ लीजिए और अल्लाह का शुक्र अदा करें और उससे दुआ करें उसके बाद नमाज में खड़े हो जाए लड़का इमाम बनने और लड़की को अपने पीछे खड़े करें दोनों साथ नमाज़ पढ़े नमाज़ की नियत नमाज़ की नियत 2 रकात नमाज नफील शुकराने के वास्ते अपने दिल में करें फिर जैसे नमाज पढ़ते हो वैसे ही नमाज अदा करें उसके बाद शादी खैरियत से होने के लिए अल्लाह से दुआ करें और शादी को कामयाब बनाएं इस तरह की दुआएं करें और आखिर में दरूद शरीफ पढ़ लीजिए नमाज के बाद किसी भी काम में जल्दबाजी ना करें बल्कि लड़की से इस तरह बात करें कि उसकी थोड़ी झिझक दूर हो जाए थोड़ा अपने बारे में बात करिए थोड़ा उसकी सुनिए जब लड़की की थोड़ी झिझक दूर हो जाए तो आप साथ में सोने का इरादा करें तो उससे पहले यह दुआ पढ़ लीजिए

 बिस्मिल्लाह, अल्लाहुम्मा जन्नीबनस शैताना,व जननी विश- शैताना  मराजकताना,

तर्जुमाः







अल्लाह के नाम से ए अल्लाह दूर कर हमसे शैतान मरदुद को और दुर कर शैतान मरदूद को उस औलाद से जो तू हमें आता करेगा,

जो शख्स इस दुआ को हमबिस्तरी के वक्त पढ़ेगा तो अल्लाह उस पढ़ने वालों को अगर औलाद अता फरमाए तो उह औलाद को शैतान कभी भी नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा

नोटः

यह याद रखिए कि जो पेशानी के बाल पकड़कर दुआ करना है वह सिर्फ पहली रात में ही पढ़ना है और एक ही बार पढ़ना है लेकिन यह वाली दुआ 

बिस्मिल्लाह, अल्लाहुम्मा जन्नीबनस शैताना,व जननी विश- शैताना  मराजकताना, हमेशा पढ़नी है जब भी बीवी के साथ सोने का इरादा हो उससे पहले इस दुआ को पढ़ ले

Ladki ki shadi,marji ke khilaf,

Ladki ki shadi,marji ke khilaf,

एक लड़की की शादी उसकी मर्जी के खिलाफ एक सीधे-साधे लड़के से की जाती है जिसके घर में एक मां के अलावा और कोई नहीं है दहेज में लड़के को बहुत सारे उपहार और पैसे मिले होते लड़की किसी और लड़के से बेहद प्यार करती थी और लड़का भी लड़के शादी हो कर आ गई अपने ससुराल सुहागरात के बाद लड़का दूध लेकर आता है तो दुल्हन सवाल पूछती है अपने पति से एक पत्नी की मर्जी के बिना पति उसको हाथ लगाए तो उसे बलात्कार कहते हैं या हक़ पति ने कहा आपको इतनी लंबी और गहरी जाने की कोई जरूरत नहीं है बस दूध लाया हूं पी लीजिए गा म सिर्फ आपको को शुभरात्रि कहने आए थे कह के कमरे से निकल जाता है लड़की मन मार कर रह जाती है क्योंकि लड़की चाहती थी  कि किसी तरह झगड़ा हो और बखेड़ा खड़ा कर सके ताकि मैं इस गवार से पीछा छुड़ा सकूं है तो दुल्हन मगर घर का कोई भी काम नहीं करती बस दिन भर ऑनलाइन रहती और न जाने किस-किस से बात करती मगर उधर लड़के की मां बिना शिकायत के घर का सारा काम करती मगर हर पल अपने होठों पर मुस्कुराहट लेकर फिरती  लड़का एक कंपनी में छोटा सा मुलाजिम है और बेहद मेहनती और ईमानदार करीब महीने भर बिट गये मगर पति पत्नी अब तक साथ नहीं सोये  वैसे लड़का बहुत शांत स्वभाव वाला था इसलिए ज्यादा बात नहीं करता था बस खाने के वक्त अपनी पत्नी से पूछ लेता था कि कहां खाओगी अपने कमरे में या हमारे साथ और सोने से पहले डायरी लिखने की आदत थी जो वह हर रात को लिखता था ऐसे लड़की  के पास एक स्कूटी था वह हर रोज बाहर जाती थी पति के ऑफिस जाने के बाद और पति के वापस लौटते ही आ जाती थी आज छुट्टी का दिन था लड़का भी घर पर ही था तो लड़की ने खाने को गंदा कह कर मां को अपशब्द बोल कर खाना फेंक देती है शांत रहने वाला उसका पति अपनी पत्नी पर हाथ उठा देता है मगर मां अपने बेटे को बहुत डांटती है इधर लड़की को बहाना चाहिए था

झगड़े का जो उसे मिल गया था वह पैर पटकती हुई स्कूटी लेकर निकल पड़ती है लड़की जो रोज घर से बाहर जाती थी वह अपने प्यार से मिलने जाती थी लड़की भले टूटकर चाहती थी लड़के को मगर उसे पता था कि हर लड़की की एक हद होती है जिसे इज्जत कहते हैं वह उसको बचाये रखी थी इधर लड़की अपने प्यार के पास पहुंच कर कहती है अब तो एक पल भी उस घर में नहीं रहना है मुझे आज गंवार ने मुझ पर हाथ उठा कर अच्छा नहीं किया लड़के  ने कहा तुम से तो मैं कब से कहता हूं कि भाग चलो मेरे साथ कहीं दूर मगर तुम हो कि आजकल आजकल पर लगी रहती हो लड़की ने कहा शादी के दिन मैं आई थी तो तुम्हारे पास तुम ही ने तो लौटाया था मुझे  लड़का ने कहा खली हाथ कहाँ तक भागोगे तुम्ही कहो मैंने तो कहा था कुछ पैसे और गहने साथ लेलो तुम तो खली हाथ आई थी कही दूर जाकर पैसे तो चाहिए न लड़की :..  हम दोनों मेहनत करके कमा भी सकते थे न 

 

लड़का : खाली हाथ भागते तो यह इश्क का भूत 2 दिन में उतर जाता समझी  और जब भी तुम्हें छूना  चाहता हूं बहुत नखरे हैं तुम्हारे बस कहती हो शादी के बाद लड़की ने कहा: हां शादी के बाद ही अच्छा होता है यह सब और सब तुम्हारा तो है मैं आज भी एक कुंवारी लड़की हूं शादी करके भी आज तक उसे चुने नहीं दिया मेरे शरीर को उस गवार के साथ सो ना सके क्योंकि तुम्हें ही अपना पति मान चुकी हूं बस तुम्हारे नाम के सिंदूर लगान  बाकी है बस वह लगा दो सब कुछ तुम अपनी मर्जी से करना लड़का  ने कहा: ठीक है मैं तैयार हूं मगर इस बार कुछ पैसे जरुर साथ लेकर आना यह मत सोच लेना की हम तो दौलत से प्यार करते हैं बल्कि ऐसा नहीं हम सिर्फ तुमसे प्यार करते हैं बस कुछ छोटे-मोटे बिजनेस के लिए पैसे चाहिए लड़की ने कहा: गवार के पास कहां होगा पैसा मेरे बाप से ₹3 लाख रुपया ऊपर से मारुति कार ली है बस कुछ गहने है वह लेके आउंगी  लड़का लड़की को होटल का पता देकर चला जाता है लड़की घर आकर फिरसे लड़ाई करता है

मगर अफ़सोस वह अकेली चिल्लाती रहती है लड़के ने फोन पर  कहा जल्दी आना मैं होटल के बाहर खड़ा रहूंगा बाय लड़की अपने पति को बोल देती है कि मुझे खाना नहीं चाहिए मैंने बाहर खा लिया है इसलिए मुझे कोई परेशान ना करें इतना कहकर दरवाजा बंद कर के अंदर आती है कि पति बोलता है कि वह अलमारी से मेरा डायरी दे दो फिर बंद करना  दरवाजा हम परेशान नहीं करेंगे लड़की दरवाजे खोले बिना कहती है कि चाबी दो  अलमारी की लड़के ने कहा तुम्हारे बिस्तर के





पैरों तले है चाबी मगर लड़की उनके बात पर धियान नहीं देता और दरवाजा नहीं खुलती बल्कि जोर-जोर से गाना सुनने लगती है और नाचने लगती है बाहर कुछ देर दरवाजा पीटता है फिर हार जाता है लड़की ने बड़ी जोर से गाना बजा रक्खा था फिर कुछ देर नाचने के बाद अलमारी खोलकर देखती है जो उसने पहली बार खोला था क्योंकि वह अपना सामान अलग अलमारी में रखती थी  अलमारी खोलते ही हैरान रह जाती है अलमारी में उसके अपने पासबुक एटीएम कार्ड थे जो  उसके घर वालों ने छीन के रक्खे थे  खोल कर चेक किया तो उसमें वह पैसे भी ऐड है जो दहेज में लड़के को मिले थे और बहुत सारे गहने भी जो एक पेपर के साथ थी और उसकी मालकिन लड़की के नाम थी फिर उसकी नजर डायरी में पड़ती है  जल्दी से डायरी निकालके पढ़ने लगती है लिखा था तुम्हारे पापा ने एक दिन  मेरी माँ की जान बचायी थी अपनी  खून देकर  अपनी माँ से बहुत प्यार करता हूँ इसलिए मैंने झुककर आपके पापा को परनाम करके कहा था आपका यह अनमोल अहसान कभी नहीं भूलूंगा और आप के लये अपनी जान भी हाजिर है 

एक नौकरानी की कहानी /फिरओन का जुल्म का शिकार

 एक नौकरानी की कहानी /फिरओन का जुल्म का शिकार 

 एक औरत मूसा अलैहिस्सलाम पर ईमान ला चुकी थी एक दिन वह कंघी कर रही थी उसी दौरान उसने अल्लाह का जिक्र किया तो फिरौन की बेटी पूछता है तुम किस अल्लाह का जिक्र किया तो उसने कहा मूसा के अल्लाह की तो उसने कहा किया तुम मेरे बाप को अल्लाह नहीं मानते हो तो  बोली बेशक तुम्हारा बाप अल्लाह के नफरत के भी लायक  नहीं और वह अपने आप को अल्लाह कहता है फिरौन की बेटी गुस्से में आकर अपने बाप के पास पहुंची और सारा माजरा उसे सुना दिया फिरौन ने उस मोमिना औरत को बुलाकर पूछा कि किया यह बात सच्ची है जो मैंने अपनी बेटी से सुना बोली बिल्कुल सच है मैं तुझे हरगिज अल्लाह नहीं मानती और मूसा अलैहिस्सलाम का कलमा पढ़ती हूं फिरौन गुस्से से लाल पीला जल्लाद को बुलाकर उसे लिटा कर उसके हाथ और पैर में  कील ठुकवा कर हुक्म दिया की   उसका घर जाओ और उसकी औलाद को उठा कर लावो आखिर कर एक दूध पीती छोटे बच्चे को ले आया और उस औरत के सामने उसे मरने की तैयारी की यह सब देख औरत डर के मरे चिल्लाने लगी  उसी वक्त

 



उस बच्ची को अल्लाह का नियामत आ पहुंचा और वह बोलने लगी 

और कहने लगी अरे मां मत परेशान हो तू सब्र कर और अल्लाह पर कायम रह बाकि अल्लाह सब कुछ जानने वाला है इसकी जुल्म तुम्हारे और हमारे लिए जन्नत का दरवाजा खोल देगी और जन्नत में पहुँच कर इस तकलीफ का भरपूर बदला अल्लाह ताला देने वाला है और थोड़ी देर के बाद फिरौन के हुक्म से उस दोनों को मौत के पास पहुंचा दिया जाता है 

नतीजा :......... 

जिस ने अपने आप को अल्लाह ताला की राह में मिटा दिया हो  उसके लिए जहन्नम हराम है और यह सबसे आला रहमत अल्लाह ताला का है और अल्लाह ताला कहता है जिसने सब्र किया उसके साथ अल्लाह है और उनके लिए 


जन्नत का दरवाजा खुला है 

शैतान का थूक/shaitan ka thuk

 शैतान का थूक/shaitan ka thuk


Allah Ne Jab hajrat adam alaihissalam ka putla banakar taiyar kiya to allah ke hukm se fariste hajrat adam ke is putla mubarak ki sajda karte the magar shaitan yah dekh kar usse bardast nahi huwa aur ek martaba us shaitan iblish ne hasad me aakar hajrat adam ke putla mubarak me thuk diya.yah thuk hajtlrat adam ke naf me padi allah tala ne jibrail alaihissalam ko hukm diya ki jahan thuk lagi hai wahan ka mitti nikal do aur us mitti ka kutta ka putla bana do baharehal us shaitan ke thuk ke jagah ka mili mitti ka kutta ka putla bana diya. isliye

Yah kutta insan ka paltu  hai ki mitti adam ki hai aur ganda isliye hai ki thuk shaitan ka hai rat ko jagta isliye hai ki ki hath isme jibrail alaihissalam ke lage hain.

👌 Rihul bayan jild 1 safa 68

💐 sabak~

Shaitan ke thuk se hajrat adam ka martaba aur badha . Magar  naf (pet) ke liye wajhe jinat ban gaya isi tarah allah ke pass me allah ka nafarmani  karne se un allah ke nek bande ka kuch nahi hoga yahan tak ki unki shan aur bhi jagmagata rahega. Yah bhi wajeh huwa ki allah ke imandar bande ko fareb dhokhebaji aur nafrat ki nigah se dekhna shaitan ka kam hai 

Jis tarah abhi wasim rijvi allah ki bat par 


ungli uthaya hai aur narsimhanand allah se gustakhi ki hai 

Jajakallah khaira

ramjan ke kuch facts /id ul fitr ki puri roje ki jankari /jo aap ko janna jaruri hai







 ramjan facts /id ul fitr ki puri roje ki jankari /जो आप को जानना जरुरी है 

रमजान के महीने लोग रोजे रखता है और अल्लाह ताला को याद करते हैं और पूरे महीने के दौरान रोजे रखते हैं। तीस या उन्तिश  दिनों तक इबादत का दौर चलता रहता  है और फिर ईद मनाई जाती है। ईद के दिन नमाज से पहले गरीब और जरूरतमंदों में फितरा बांटा जाता है यह फ़ित्रा हर आदमी छोटे बड़े पर फर्ज है । यही वजह है कि इस ईद को ईद-उल-फित्र या ईद-उल-फितर कहा जाता है और ईद के दिन मीठी चीज की पकवान बनता है जोसे सेवइयां पव्वा और बहुत तरह की पकवान बनता है ।

फितरा :............ 

 हर एक आदमी पर एक शा यानि लगभग 250 Kg खाने की चीजों से निकल कर गरीबो में बाँटना है ईद का नमाज से पहले ताकि यह जरुरत मंद तक बा अशनि पहुँच सके और वह भी इस खुसी में शामिल हो 

हदीश नबीबी :....... نْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ زَكَاةَ الْفِطْرِ طُهْرَةً لِلصَّائِمِ مِنْ اللَّغْوِ وَالرَّفَثِ وَطُعْمَةً لِلْمَسَاكِينِ مَنْ أَدَّاهَا قَبْلَ الصَّلَاةِ فَهِيَ زَكَاةٌ مَقْبُولَةٌ وَمَنْ أَدَّاهَا بَعْدَ الصَّلَاةِ فَهِيَ صَدَقَةٌ مِنْ الصَّدَقَاتِ


1608 या 1609سنن أبي داود كتاب الزكاة باب زكاة الفطر


तर्जुमा :   इब्न अब्बास ने सूचना दी: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया  ज़कात अल-फ़ित्र  रोजे  करने वाले को व्यर्थ की बातों और दुर्व्यवहार से शुद्ध करने के लिए है इसे  गरीबों को दिया जाये  जो कोई ईद की नमाज़ से पहले इसे अदा करता है उसे ज़कात के रूप में स्वीकार किया जाता है और  जो कोई ईद की नमाज के बाद इसका अदायगी  करता है वह स्वैच्छिक दान का हिस्सा है।


1. रमज़ान के पुरे महीने के दौरान हर मुसलमान रोज़े रखता है छोटे बच्चों गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को छोड़कर हर इंसान पर फर्ज है और हैजा औरत के लिए रमजान के बाद उसकी अदायगी का हुक्म है 

2. इस महीने में शाम की इफ्तार का खास भोजन खजूर होता है इसके पीछे की मान्यता है कि पैगम्बर मोहम्मद ने अपने रोज़े भी खजूर खाकर खोले थे और खजूर न होने पर पानी से खोले यह साबित है  

3. रमज़ान का महीना पूरे 30 या 29  दिन का होता है और हर दिन रोज़ा रखा जाता है मान्यता है कि इस महीने हर रोज़ कुरान पढ़ने से ज़्यादा सबाब मिलता है.कियों की अल्लाह ताला ने इसी महीने कुरान पाक की नुजूल फ़रमाया 

4. रमज़ान के महीने को तीन हिस्सा  में बांटा जाता है 10 दिन के पहले हिस्सा को 'रहमतों का दौर' बताया गया है. 10 दिन के दूसरे हिस्सा को 'माफी का दौर' कहा जाता है और 10 दिन के आखिरी हिस्से को 'जहन्नुम से बचाने का दौर' पुकारा जाता है जो इन्शान रमजान के आखरी दस दिन अल्लाह से माफ़ी मांग कर अपनी गुनाह को माफ़ करवाया वह जहन्नुम से बच सकता है 

5. रोज़ा के दौरान हर मुसलमान खाने-पीने के साथ साथ अपनी बीबी से सेक्स  अपशब्द गुस्सा करने से भी परहेज करते हैं और इस दौरान जियादा से जियादा  कुरान पढ़कर और नमाज के जरिए अल्लाह को से माफ़ी माँगा जाता है. 

6. रमज़ान में एक  दिन शब-ए-कद्र होती है इस दिन सभी मुस्लिम रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं. इस रात की इबादत 1000 महीने की इबादत के बराबर है  

7. इस बार रमज़ान में 4 जुमे पडेंगे. रमज़ान का जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है.जो सही नहीं है इसमें कुछ मिलावट है  

8. आपने देखा होगा कि रमज़ान की हर तस्वीर में लालटेन ज़रूर होगा इस लालटेन की सच्चाई  है कि रमज़ान के महीने में मिस्र के बाजारों में लोग बड़ी-बड़ी लालटेन लगाकर सड़कों को सजाते हैं इसके पीछे मान्यता है कि मिस्र के खलीफा का स्वागत राजधानी काहिरा में लालटेन लगा कर किया जाता है यह एक सुन सुनी बात है इसका भी रोजे से कोई ताल्लुक नहीं हैं और यह रसूल की बात भी नहीं है 



9. रोज़े की शुरुआत सुबह सूरज के निकलने से पहले के भोजन से होती है जिसे 'शेहरी ' कहा जाता है और सूरज डूबने के बाद के भोजन को 'इफ्तार' कहा जाता है.

10. रमज़ान को नेकियों का मौसम और मौसम-ए-बहार (बसंत) भी कहा जाता है.कियों की अल्लाह ने इस महीने में जन्नत का दरवाजा खोल देता है और जहन्नाम का दरवाजा बंद कर देता है इसका मतलब इंसान को अल्लाह ताला इस मुबारक महीना दे कर कहता है की जन्नत ले लो हम ने तुम्हारे लिए खोल रक्खा है ! और जो इन्शान नहीं ले सका वह सबसे घाटे में है 


इस्लाम का जन्म। इस्लामिक कहानियां |इस्लामिक इतिहास|अबूबकर का इस्लाम में प्रवेश

इस्लाम का जन्म।  इस्लामिक कहानियां /इस्लामिक इतिहास /अबूबकर का इस्लाम में प्रवेश 

इस्लाम का जन्म :….....




 वर्ष 610 में एक दिन जब मुहम्मद (सल्लाल0) मक्का के बाहर गारे हिरा की गुफा में अल्लाह को याद कर रहे थे, तो स्वर्गदूत जीबराईल अलैहीस्सलाम ने उसे दर्शन दिए, और उसे यह संदेश दिया कि अल्लाह ने उसे अपने संदेश के रूप में चुना है और वह था  लोगों को इस्लाम का संदेश देने के लिए  वह एक उपन्यास सनसनी थी जैसे ही  पैगंबर घर आया उसने महसूस किया कि वह उत्तेजित था  ख़दीजा ने उसे दिलासा दिया और वह पहली शख्स थी जिसे इस्लाम में परिवर्तित किया गया  खदीजा ने अपने चचेरे भाई वरका से सलाह ली जो धार्मिक विद्या में महान थे  उन्होंने खदीजा को ख़ुशी-ख़ुशी यह जानकारी दी कि उनके पति अल्लाह  के पैगंबर हैं  जिनके आने  के बारे में यहूदियों और ईसाइयों के धर्मग्रंथों में उल्लेख था ख़दीजा के बाद अली फिर पवित्र पैगंबर के साथ रहने वाले एक युवा लड़के ने इस्लाम कबूल कर लिया  इसके बाद जैद बीन हरिश एक गुलाम जिसे पवित्र पैगंबर ने गोद लिया था वह  मुस्लिम बन गया था।
 अबू बक्र का इस्लाम में रूपांतरण:--------------
  जब  पैगंबर मोहम्मद ने इस्लाम की दावत दी तो अबू बक्र मक्का से बाहर गए हुये थे  वह यमन की व्यापारिक यात्रा पर गए थे जब अबू बक्र मक्का में वापस आया तो उसे उसके कुछ दोस्तों ने बताया कि उसकी अनुपस्थिति में मुहम्मद (सल्लाल0) ने खुद को अल्लाह का दूत घोषित किया है और एक नए धर्म की घोषणा की है   यह सुनकर अबू बक्र ने पैगंबर को बुलाने में कोई समय नहीं गंवाया
 पवित्र पैगंबर ने अबू बकर को गारे हिरा की गुफा में अपने स्वर्गदूत जीबराईल की यात्रा और अल्लाह की आज्ञा के बारे में लोगों को अपने पास बुलाने का पूरा विवरण बताया यह सब सुनने पर अबू बक्र प्रेरित महसूस करते हैं  उसने महसूस किया कि पवित्र पैगंबर ने जो कहा था वह सच है  अल्लाह से अभिभूत और सत्य की खोज पर आनंद से लबरेज अबू बक्र ने कहा मैं आपके और आपके इस्लाम की पैगाम को अपने दिल की गहराई से मानता हूं मैं गवाही देता हूं और पुष्टि करता हूं कि आप जो कहते हैं वह सच है मुझे अपने पास बुलाएं वास्तव में आप अल्लाह के पैगंबर हैं और यह एक महान सम्मान है
 पवित्र पैगंबर ने अपना हाथ बढ़ाया और अबू बक्र ने इसे विश्वास और निष्ठा के निशान के रूप में श्रद्धापूर्वक समझा  उन्होंने बड़ी गंभीरता के साथ घोषणा की अल्लाह के अलावा कोई भगवान नहीं है और मुहम्मद उनके पैगंबर और दूत हैं  इस घोषणा ने पवित्र पैगंबर और अबू बकर के बीच नए बंधनों को जारी किया  पवित्र पैगंबर के केवल तीन परिवार अर्थात् ख़दीजा अली और ज़ैद बिन हरिश ने इस्लाम स्वीकार किया था।अबू बकर मुस्लिम बनने के लिए पवित्र पैगंबर के परिवार के बाहर पहला व्यक्ति था
 अबू बक्र के रूपांतरण का महत्व:---------------  
इस्लाम के उद्घोषों में अबू बक्र का रूपांतरण एक महत्वपूर्ण घटना थी  अबू बकर एक अमीर व्यापारी था और उसका व्यवसाय उसके आसपास के लोगों की सद्भावना पर निर्भर था  वह जानता था कि नए विश्वास के लिए उसका रूपांतरण उसे उसके आसपास के लोगों के साथ अलोकप्रिय बना देगा और इससे उसके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा  वह अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह के रूपांतरण से वह कुरैश के क्रोध और शत्रुता को आमंत्रित करेगा  लेकिन उनका मन बना हुआ था  उसने महसूस किया कि मुहम्मद (सल्लाललाहो0) ने सत्य की खोज की है और उसके लिए आवश्यक था कि सच्चाई  का समर्थन दिल से किया जाए चाहे कुछ भी हो
 अपने रूपांतरण से पहले अबू बक्र ने कोई सवाल नहीं पूछा  उसने किसी भी तर्क में प्रवेश नहीं किया उसने कोई शर्त नहीं रखी और वह कोई आश्वासन नहीं चाहता था उसने एक पल के लिए भी संकोच नहीं किया  कोई संदेह नहीं है उसे  और उसके मन में कोई डर नहीं था  इस्लाम में उनकी आस्था की घोषणा की थी मानो वह जीवन भर ऐसी ही घोषणा का इंतजार करते रहे हों
 वर्षों बाद पवित्र पैगंबर ने अबू बक्र के धर्मान्तरण को याद करते हुए कहा जब भी मैंने किसी को इस्लाम की पेशकश की उसने हमेशा कुछ अनिच्छा और झिझक दिखाई और एक तर्क में प्रवेश करने की कोशिश की अबू बकर एकमात्र व्यक्ति था जिसने बिना किसी हिचक के इस्लाम स्वीकार किया बिना किसी तर्क के
 अबू बक्र द्वारा इस्लाम को अपनाने का  कारण। :..........................
 अबू बक्र के अलावा खदीजा दूसरे व्यक्ति थे जिन्होंने इस्लाम को आसानी से और बिना किसी संकोच के स्वीकार कर लिया था ख़दीजा के मामले में हम जानते हैं कि उसका पहले से ही एक अनुमान था कि मुहम्मद (सल्ल।) का भविष्यवक्ता बनना तय था  वास्तव में उसे मुहम्मद (सल्लाललाहो0) से शादी करने के लिए प्रेरित किया गया था क्योंकि उसे एक  विश्वास था कि एक बड़ा तक़दीर  मोहम्मद का इंतजार कर रहा है
 ऐसा  होता है कि अबू बकर को एक बड़ा आंतरिक विश्वास था कि एक महान भाग्य ने मुहम्मद (सल्लालाहो0) की इंतजार की  एक कहानी है कि जब बारह साल की उम्र में मुहम्मद अपने चाचा अबू तालिब के साथ एक व्यापार कारवां के साथ सीरिया गए थे और मुहम्मद (सल्लालाहो0) को देखने वाले भिक्षु बहिरा ने उनके लिए भविष्यवाणी की थी अबू बक्र भी उनके साथ थे  कारवां में और उस दिन के बाद से अबू बक्र ने इस विश्वास को मान लिया

 था कि मुहम्मद (सल्ल0) पैगंबर बनने वाले थे अबू बक्र ने बहुत सी देश की  यात्रा कीऔर इस तरह की यात्रा के दौरान उनके पास यहूदी रब्बियों और ईसाई भिक्षुओं से सीखने का अवसर था कि एक पैगंबर के आगमन की उम्मीदहै इसका तात्पर्य यह है कि अबू बकर पहले से ही एक नबी के आगमन की उम्मीद कर रहा था और जब मुहम्मद (सल्लालाहो0)ने अपने भविष्यवक्ता की घोषणा की अबु बकर मुहम्मद के ईमानदारी चरित्र के बारे में जानता था (सल्लालाहो0)  यह महसूस किया कि मुहम्मद (सल्लालाहो0) पैगंबर थे जिनके आगमन की उम्मीद थी और इस तरह नए विश्वास को स्वीकार करने में उनकी ओर से कोई झिझक नहीं था
 जैसे-सुआती के पवित्र पैगंबर के आगमन के बारे में अबू बकर के प्रीमियर का विवरण  As-Suyuti की किताब हिस्ट्री ऑफ़ द कैलिप्स मे एक पृष्ठ है जो इस निष्कर्ष को पुष्टी करता है कि अबू बकर का पैगंबर के आगमन के बारे में एक अनुमान था इससे पहले कि मुहम्मद )सल्लालाहो0)ने अपना मिशन घोषित किया होअबू बकर ने वारक़ बिन नफ़ल का दौरा किया था जो शास्त्रों में विशेषज्ञ थे और वरक़ा ने पैगंबर के आगमन के अबू बकर को बताया था अस-सुयुति के अनुसारअबू बकर को घोषित करने की सूचना दी गई है पैगंबर के आगमन के बारे में मेरा एक अनुमान था इसलिए जब भगवान के प्रेषित को भेजा था तो मैंने उस पर विश्वास किया और उसकी गवाही दी
 अल-बहाकी के अनुसार, 
अस-सुयुति के हवाले से अबू बकर ने इस्लाम को आसानी से स्वीकार कर लिया क्योंकि वह भविष्यवाणिय  को देखनेऔर  सबूतों को देखने का आदी था अल बाहाकी अब्बास मेसराह के अधिकार पर भी कहता है जो अब्बास  पवित्र पैगंबर के चाचा थे कि जब बात करने से पहले पवित्र पैगंबर आगे बढ़ते थे तो वह किसी अदृश्य व्यक्ति से बात करते हुए सुनते थे हे मुहम्मद  पवित्र पैगंबर अबू बकर को इन आवाजों के बारे में बताते थे जो उनके अंतरंग मित्र थे
 अबू बक्र पर इस्लाम का प्रभाव:-----------------
 इस्लाम ने अबू बक्र के जीवन के पाठ्यक्रम को बदल दिया  धर्मांतरण से पहले उन्हें  काबा के नाम से जाना जाता था  नाम बुतपरस्ती का संकेत था और धर्मांतरण के बाद पवित्र पैगंबर ने उसका नाम अबु बकर में बदल दिया  नाम में परिवर्तन ने अबू बक्र के लिए जीवन के उद्देश्य में बदलाव को चिह्नित किया वह अब काबा का नौकर नहीं   वह अल्लाह का ईमानदार सेवक था
 पारिवारिक संबंध में बदलाव  इस्लाम ने अबू बक्र के पारिवारिक संबंधों में एक बदलाव लाया उनकी पत्नी कुतेला ने इस्लाम स्वीकार नहीं किया और उन्होंने उसे तलाक दे दिया  उनकी दूसरी पत्नी उम्मे रुमान उनके बात पर मुस्लिम बन गईं अब्दुर रहमान को छोड़कर उनके सभी बच्चों ने इस्लाम कबूल कर लिया और अबू बक्र अपने बेटे अब्दुर रहमान से अलग हो गए
 अबू बकर की इस्लाम के लिए सेवाएं:-------------------
अबू बक्र चतुर फैसले का आदमी था वह अत्यधिक बुद्धिमान था और सत्य को समझने की भावना से संपन्न था जब अबू बक्र ने बिना किसी संकोच के नए विश्वास को स्वीकार किया जो इस बात का द्योतक था कि इस्लाम सत्य हे  अबू बक्र के रूपांतरण ने वास्तव में इस्लाम के विस्तार की गति निर्धारित की अबू बकर ने काफी सामाजिक प्रभाव की सराहना की और उन्होंने इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के प्रभाव को सेवा में दबा दिया उसने अपने धर्म परिवर्तन का कोई रहस्य नहीं बनाया वास्तव में वह गौरवान्वित महसूस करते थे और सम्मानित करते थे कि उन्हें इस्लाम का आशीर्वाद प्राप्त है  वास्तव में वह अल्लाह  के दूत का दूत बन गया  उसने अपने अंतरंग दोस्तों को इस्लाम कबूल करने के लिए मना लिया  उन्होंने इस्लाम को इस तरह से दूसरों के सामने पेश किया कि उनके कई दोस्तों ने इस्लाम में आगये 
 अबू बक्र के मिशनरी प्रयास:------- 
अबू बक्र के कहने पर इस्लाम कबूल करने वालों में थेओथमैन बिन अफ्फान जुबैर बिन अवाम तलहा बिन उबैदुल्लाह अब्दुर रहमान बीन औफ सा'द बीन अबी वकास उमर बीन मासोअन अबू उबैदाह बीन  अल-जर्राह अब्दुल्ला बीन  अब्दुल असद अबू सलमा खालिद बीन सईद अबु हुदैफा  वे सभी  उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा के पुरुष थे और वे इस्लाम के लिए बहुत बड़ी संपत्ति साबित हुए
 रूपांतरण के बाद  इस्लाम में धर्म परिवर्तन से पहले अबू बक्र मुहम्मद से कभी-कभी मिलते थे मुस्लिम बनने के बाद अबू बक्र ने अपना अधिकांश समय पवित्र पैगंबर की कंपनी में हर दिन बिताने का एक बिंदु बनाया  इस्लाम में रूपांतरण ने अबू बक्र के जीवन में एक अभूतपूर्व परिवर्तन किया।  इस्लाम में धर्म परिवर्तन के समय वह सत्ताईस वर्ष से थोड़ा अधिक थ  उसके बाद वह छब्बीस वर्षों तक जीवित रहाऔर इन सभी वर्षों के दौरान इस्लाम उसके लिए अंत था और सभी अस्तित्व में था
 अबू बक्र के रूपांतरण का महत्व:-------------- 
गब्बन (रोमन साम्राज्य का पतन और पतन) के अनुसार अबू बक्र की सत्यता ने नए धर्म की पुष्टि कीऔर निमंत्रण के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया माइर ने मुसाहेदा किया (जीवन मुहम्मद का)अबू बकर का निर्णय था  उनकी बातचीत सहमती और उनके शालीनतापूर्ण व्यवहार और कुरैशी द्वारा मांगी गई और वह पूरे शहर में लोकप्रिय थी अबू बकर का विश्वास अपने करियर की शुरुआत में मुहम्मद की ईमानदारी की सबसे बड़ी गारंटी थी  और वास्तवमें अपने पूरे जीवन में ऐसे व्यक्ति को अपने दावे के कट्टर अनुयायी के रूप में रखना मुहम्मद के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम था

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ISLAMIC KAHANIYAN Jannat Ka Bazaar...............................



 हदीस11 :-- हजरत अनस रजि अल्लाह ताला अनु से रिवायत है कि जनाब रसू0  ने इरशाद फरमाया:  

 जन्नत में एक बाजार होगा जिसमें कस्तूरी के पहाड़   होंगे हर जुमा को जन्नती  वहां जाएंगे और उत्तरी  की हवा चलेगी जो उनके चेहरों  और मलबूसात  पर पड़ेगी तो वह लोग हुस्न जमाल में बढ़ जाएगी और अपने घरवालों की तरफ  लौटेंगे उनका हुस्नो जमाल बहुत बढ़ चुका होगा उनकी बीवियां उनसे कहेंगे कसम खुदा की  हमारे बाद आप हजरात हुस्नो जमाल में खूब बढ़  गए हो

तो वह कहेंगे और तुम भी तो अल्लाह की कसम हमारे बाद हुस्नो जमाल में बढ़ चुकी हो 

 जन्नती अपनी शक्ल बदल सकेंगे अपनी मर्जी के मुताबिक 

 हदीस2 :-- हजरत अली रजि अल्लाह ताला  की रिवायत है कि जनाब रसूल0  ने इरशाद फरमाया1 : तर्जुमा जन्नत में एक बाजार है जिसमे 

कोई  खरीद बिक्री नहीं होगी 

बल्कि मर्द और औरत की सकलें होगी जब कोई मर्द  किसी शक्ल को पसंद करेगा तो वह अपने आप  में उस चेहरे पर  हो जाएगा (और उस मर्द की वेसी ही शक्ल हो जाएगी )और वहीं पर हूरें कि भी महफ़िल होगी  जो ऐसी ऊंची और खूबसूरत आवाजों में नगमा सराई करेगी कि वैसी  नगमा सराय मखलुकात ने ना सुनी होगी वह कहेंगी तर्जुमा5 :--हम हमेशा जिंदा रहेंगे कभी मौत  ना होगें  हम नेमतों में पलने वाले हैं!

कभी खस्ताहाल ना होंगी हम राजी रहने वाली है अपने खावंदों  पर कभी नाराज ना होगी, खुशखबरी और मुबारक हो उसको जो हमारा खावंद है और हम उस की बीवियां हैं  

जिस्मों  की खुशबू में इजाफा4 :-- हजरत अनस बिन मालिक रजी0  ताला अ0  फरमाते हैं कि जन्नाति  आपस में कहेंगे कि चलो जन्नत की तरफ चलें जब वह टीलों या  पहाड़ों  पर पहुंचेंगे फिर वापस अपनी बीवियों के पास लौटेंगे तो कहेंगे हम तो तुमसे ऐसी खुशबू महसूस कर रहे हैं जो पहले तुमसे नहीं आती थी जब हम तुम हमारे पास से गए थे तो वह कहेंगे आप भी तो ऐसी खुशबू के साथ लौटे हैं जो इससे पहले नहीं आती थी जब तुम हमारे पास से  गए थे


बाजार की नेमतें8  :---  हजरत सईद बिन अल मासिब  रहमतुल्लाह से मरबी है कि उनकी हजरत अबू हुरैरा रजि0  से मुलाकात हुई तो हजरत अबू हुरैरा रा० अनु ने फरमाया अल्लाह ताला हमें और आपको जन्नत के बाजार में मिला दे तो हजरत सईद बिन अल मासिब ने अर्ज कियाअइ अबू हुरैरा क्या जन्नत में बाजार भी होगा! फरमाया हां6  उस में ऐसी-ऐसी नेमते होंगी जिनको आंखों ने नहीं देखा और ना दिलों में उनका ख्याल आया  और ना ही उनको कानों ने सुना है ! बहरेहाल  यह जन्नती उस बाजार से जिस चीज का दिल चाहेगा ले लेंगे उस बाजार में लोग एक दूसरे से मुलाकात करेंगे हत्ता के उन लोगों में से हर एक शख्स वह शख्स से भी मुलाकात कर सकेगा जो उससे ऊपर के दर्जा में होगा जबकि उसके लिबास को देखेगा तो उसको घबराहट होगी उसका ताज्जुब अभी खत्म ना हुआ होगा की छोटे तबका के  जन्नती को  भी वैसा ही लिबास पहना दिया जाएगा या उससे भी ज्यादा खूबसूरत लिबास पहना दिया जाएगा इसलिए के वहां कीसी आदमी  के लिए मुनासिब ना होगा की वह जन्नत में गमगीन रहे  जैसा की अल्लाह ताला इरशाद फरमाते हैं7 !  अल्लाह ताला कुराने पाक में यह इरशाद फरमाते हैं9 :-- तर्जुमा और (वहां  जन्नत में दाखिल होकर) कहेंगे कि अल्लाह का लाख-लाख शुक्र है जिसने हमसे हमेशा के लिए रंजो गम दूर किया है बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्सने  वाला और बड़ा ही कदरदान है जिसने हमको अपने फजल से हमेशा रहने के मुकाम में ला उतारा जहां ना हमको कोई उल्फत पहुंचेगी और ना हम को कोई सामान की कमी  पहुंचेगी!

 हर वक्त नेमत और शानो शौकत में बढ़ोतरी13  : 

हदीस7 :---- हजरत हसन रहमतुल्ला अन्हु रिवायत है कि जनाब रसूलल्लाह सल्ल0   इरशाद फरमाया तर्जुमा जन्नत में एक बाजार है जिसमें कस्तूरी के टीले है जो बर्फ से ज्यादा सादा हैं जब जन्नती हजरात उस टीले में  प्रवेश होंगे तो अल्लाह ताला उन पर एक हवा चलाएंगे उस हवा का नाम मसिरह होगा जो उन पर मास्क पासी  करेगी फिर जब यह हजरत वहां से लोट कर अपनी बीबियों के पास जायेंगे और उन पर खुसबूदार चमकने दमकने रंगीनियां बिखरती  हो रही होंगी तो वह कहेगी की तुम इतना खुबसुरतियों के साथ तो हम से रवाना नहीं हुए थे तो वह कहेंगेर तुम भी तो अल्लाह की कसम हमारे सामने पाकीजगी  और हुस्नो जमाल में बढ़ रही हो 

खावंद बीबी की पसंदीदा सकलें8 :---- 

तर्जुमा 1 :----हजरत ओबैद बिन आमिर रहमतुल्लाह से रवायत  है की जनाब रसूल0  ने इरशाद फरमाया 

तर्जुमा10 :------जन्नत में एक बाजार है जिसमें जनती हजरात के लिए खूबसूरत शक्ल बनाई गई है जन्नतियों  में से जब कोई किसी शक्ल को पसंद करेगा तो वह उसी शक्ल में दाखिल हो जाएगा फिर वह अपनी बीवी की तरफ लौटेगा उसको देखेगी तो कहेगी ऐ अल्लाह के बन्दे  मैंने आपको आज से ज्यादा खुबशुरत   कभी नहीं देखा आप कहां थे तो वह कहेगा मैं औलिया अल्लाह के साथ जन्नत के बाजार में था अल्लाह ताला ने हमारे लिए उस बाजार में हसीन सूरत जमा फरमाई  थी हम में से हर एक आदमी ने जो सूरत अपने लिए पसंद की वह इसी शक्ल में तब्दील होकर गया है मैंने भी अपने लिए एक सूरत  पसंद की जिसमें अब नजर आ रहा हूं !ऐ अल्लाह की वलि मैं तुम्हें कैसा लग रहा हूं तो कहेगी ऐ  अल्लाह के बंदी  मैंने आज आपसे ज्यादा कोई चीज खुबशुरत  नहीं देखी


अल्लाह के बन्दे अब मैं आपको कैसी लग रही हूं तो वह कहेगा मैंने आज तुमसे ज्यादा हसिन चीज नहीं देखी

Islamic kahani,हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह,ka jabardast, kissa,part2


Islamic kahani,हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह,ka jabardast, kissa,part2
 
पीछे आने वाले रास्ता जान सके गुजरने वाला कहां से इनका साथी गुजरा है आखिरकार शहजादी और सुल्तान एक साथ रास्ता पर आ पहुंचे कुछ दूर एक छोटे से गांव के होने की आभास आ रही थी उस सिपाही ने कहा आप की रियासत की  सीमा का ही गांव मालूम पड़ता है शहजादी हां ऐसा ही लगता है देखते हैं गांव पहुंचने पर शहजादी ने गांव के मुखिया को बुलाया मुखिया अपने कुछ साथियों समेत शहज़ादी के पास हाजिर हुआ शहजादी ने कहा हमें दो तेज रफ्तार घोड़े दे और कुछ सूखा अनाज इस सिपाही को दीया जाए शहजादी ने सिपाही

से कहा अजनबी हमें बहुत हैरत हुई तुम पर आखिर तुम किस मिट्टी के बने हो सारी रात तुम अपने खंजर से अपने जिस्म को काटते रहे और मेरी तरफ कोई तवज्जो ना दी तुम चाहो तो हमारे साथ महल चलो हम तुम्हें इनाम देंगे अपनी जान बचाने के बदले मे सुल्तान ने घोड़े पर सवार होकर शहजादी से कहा शहजादी साहिबा तकलीफ इसलिए दे रहा था के आपका हुस्न मेरे ईमान को बर्बाद ना करें और मेरा ध्यान मेरे दर्द की तरफ रहे आपकी तरफ ना जाये शहजादी क्या तुम्हें यह मौका गंवाना चाहिए था हमसे अकेले में मुलाकात के लिए लोग अपनी रियासतें देने को तैयार हैं सुल्तान शहजादी मैं मुसलमान हूं और मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम का गुलाम हूं मेरी नजर आपके जिस्म पर नहीं बल्कि खुद मेरी अपनी रूह पर थी शायद मेरे जिस्म से गुनाह का दाग धुल जाता लेकिन मेरी रूह पर इस गुनाह का दाग लेकर मैं अपने नबी पाक के सामने कैसे पेश होता मुझे यह मंजूर नहीं था क्योंकि अल्लाह का शुक्र है मैं एक सच्चा और ईमान वाला मुसलमान हूं शहजादी यह जवाब सुनकर सिपाही के अपने सच्चे मजहब इस्लाम के साथ लगाओ मोहब्बत और ईमानदारी देखकर उनके किरदार से लगाओ के बिना ना रह सके जैसे इसका दिल किसी अंजान आदमी के मजहब और जिंदगी में शामिल होने को तड़प रहा हो यह कह कर सुल्तान ने इजाजत चाहि शहजादी अपना और अपनी फोज का नाम तो बताते जाओ हम याद रखेंगे सुल्तान ने चादर से अपना चेहरा को छुपाया और तीर  कमान को अपने कंधे पर डाला तलवार अपने म्यान में डाली और घोड़े की रस्सी पकड़ते हुए बोले शहजादी मेरा नाम है सुल्तान महमूद गजनबी और मैं ही गजनी की अजीम फौज का वजीर हूं और सुल्तान हूं यह कह कर सुल्तान ने घोड़े पर बैठा और सर पट दौड़ाते हुए आंखों से गायब हो गई और शहज़ादी अचंभित हो कर देखता रहा 

Islamic kahani,हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह,ka jabardast, kissa,part1

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हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह अपने कुछ सिपाही के साथ जंगल में  भटक गए असर के वक्त से सूरज डूबने के तरफ जा रहा था सुल्तान जंगल में रास्ता




खोज करने में लगा था एक हिंदू धर्म की शहजादी पर नजर पड़ी जो अपनी खादिमा के साथ शायद शिकार पर निकल आई थी अकेली शहजादी और इसकी कनीज इस चीज से बेखबर नदी के किनारे अपने पांव लटकाए बैठी थी इनके पीछे एक जंगली जानवर पहुंच चुका था  इस वक्त तक के सुल्तान का तीर इसके गर्दन से आर पार होता वह शहजादी की कनीज को एक हाथ के पंजे से नोच चुका था इससे पहले शहजादी अपना धनुष संभालती और तीर कमान में लगाती शायद बहुत देर हो जाती और अपनी कनीज को बचा न पाती इससे पहले सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह ने एक के बाद एक 3 तीर इस जंगली दरिंदे पर दे मारे जिससे वह गिर गया शहजादी को यह जान ने मैं मुश्किल ना हुई के इस महारत और कारनामा का मुजाहेरा कोई जंगबाज सिपाही ही कर सकता है शहजादी सुल्तान के तरफ गया और अपनी पहचान देते हुए बोली मेरा नाम समरती है मैं जयपुर रियासत के राजा की इकलौती बेटी हूं मेरी जान बचाने का धन्यवाद मैं तुम्हें अपने पिता से कहकर फोज में कोई बड़ा पोस्ट दिला दूंगी वैसे तुम हमारी फौज के सिपाही लगते नहीं हो बताओ कहां से वाबस्ता है तुम्हारा समृति शायद यह नहीं जानती थी के इसके सामने कोई मामूली सिपाही नहीं है बल के इस वक्त की सब  से ताकतवर इस्लामी लश्कर के सबसे बड़ा सुल्तान महमूद गजनबी है जिनके नाम से ही हिंदू राजाओं के हलक सूख जाते हैं सुल्तान ने अपनी पहचान जाहिर ना करते हुए कहा जी किसी और फोज का सिपाही हूं चलिए मैं आपको कीसी सुरक्षित जगह पर पहुंचा दूं आप मेरे पीछे चलती जाएं अंधेरा बढ़ता जा रहा है रास्ता ना मिला तो शायद इसी जंगल में रात गुजारनी पड़ेगी शहजादी जान चुकी थी के  यह इंसान लालच और खौफ से पाक हैं वह सुल्तान की नजरों में शर्म वो हया देखकर खुद को महफूज महसूस कर रही थी जंगल की घना झाड़ियों की वजह से शहजादी का कुर्ता बहुत सी जगह से फट चुका था शहजादी बहुत थक चुकी थी सुल्तान ने शहजादी को एक मजबूत पत्थरों और पेड़ों की तरफ इशारा करते हुए कहा शहजादी आप इधर आराम कर ले रात बहुत हो गई है और मौसम में भी गड़बड़ी है अंधेरे में अभी घने जंगल में यात्रा  करना सही नहीं है सुबह निकले तो शायद मैं आपको किसी सुरक्षित आश्थान पर पहुंचा सकूं शहजादी के पास सुल्तान पर भरोसा करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ना था सुल्तान ने महसूस किया शहजादी अपने  फटे कपड़े में जंगल की ठंडी रात शायद ना गुजार सकें सुल्तान ने अपनी मोटी कंबल शहजादी के तरफ फेंक दी और नजरों से शहजादी को देखा जैसे कह रहा है औढ़ ले शहजादी ने देर ना करते हुए चादर औढ़ लिया और पत्थर में सर लगाकर पेड़ों के नीचे सो गए इसकी आंखे सुल्तान के चेहरे की तरफ जमी हुई थी जो आंखे झुकाए एक बड़े पत्थर पर बैठकर आग जलाने की कोशिश कर रहे थे बहुत देर के बाद आखिरकार आग जल गई इस की रोशनी में सुल्तान की नूरानी और भरा हुआ चेहरा खिल रहा था सुल्तान ने मिट्टी से वजू क्या और नमाज पढ़ने लगे शहजादी को झटका लगा अरे यह तो मुसलमान लगते हैं एक दफा शहजादी का कांपने लग गई थी कहीं या गजनी के लश्कर से तो नहीं यह तो लुटेरे हैं गाय भैंस बकरी सबका मीट खाते हैं या मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे लेकिन अगले ही पल शहजादी अब तक इसके साथ गुजरे समय को याद करने लगी अगर यह इतना ही जालिम होता तो मुझे दरिंदे से ना बचाता ना चाहते हुए भी शहजादी का दिल फिर से इत्मीनान व यकीन से भर गया सुल्तान नमाज के बाद दुआ करते वक्त बहुत जोर से रोने लगी रोते-रोते सुल्तान ने अपने चाकू कि नोक अपने पांव के अंगूठे पर रखकर इसको दबा दिया शहजादी देखती रही के यह जवान मर्द मुझसे बात करना नहीं चाहता आखिरकार सुबह सुल्तान ने शहजादी से कहा अब हमें निकलना चाहिए कुछ दूर जाकर सुल्तान को एक सफेद पत्थर पड़ा मिला जो सुल्तान के सिपाही निशानी छोड़े थे रास्ता की पहचान के लिए की रास्ता इसी तरफ है उस जमाने का एक तरीका था के जंगल में पत्थर की निशानी छोड़ते जाते ताकि

URTUGRUL GAZI EPISODE 09 | कहानी अर्तुग़रूल गाज़ी का

  URTUGRUL GAZI EPISODE 09 | कहानी अर्तुग़रूल गाज़ी का


इस तरह  गुनदुगदु दूसरे दिन अपने बसेरा में जाता है और पानी पीता है पानी पीते ही वाह बेहोश हो जाता है बेहोश होते ही सलजान खातून चिल्लाने लगता है उसके आवाज पर सभी आदमी वहां पहुंचते हैं तो गुनदुगदु जमीन पर गिरा हुआ रहता है उसे उठाकर कबीले के दवाखाना में ले जाता है और उसका इलाज करने लगता



हैअर्तुग़रूल सभी सिपाहियों को एक जगह बुलाता है और पूछताछ करता है भाई के बसेरा में कौन गया था किसी ने देखा किसी को तब एक सिपाही कहता है हां हमने एक आदमी को देखा था तो उसे पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं गुनदुगदु से मिलने गया था तब उस आदमी का अर्तुग़रूल खोज करता है लेकिन वह कबीला में मौजूद नहीं रहता उसे खोजने के लिए कुछ सिपाही को भेज देता है कुरतुगुलु ने उसे कबीला से पहले ही भगा दिया था जब उसने देखा कि कुछ सिपाही उसके तलाश में है तो वह सिपाही से पहले उस आदमी के पास पहुंचता है और उसे मार देता है सिपाही वहां पहुंचता है तो उसे मरा हुआ मिलता है यह खबर सिपाही अर्तुग़रूल को देता है तो अर्तुग़रूल कहता है इसके पीछे कोई और है जो भी है उसे मैं जल्द से जल्द खोज निकाल लूंगा और उसे जान से मार दूंगा फिर कुरतूगूलू कबीला का दवाखाना जाता है और गुनदूगद का हाल पूछता है उसके पिता से और कहता है सुलेमान शाह को कि मुझे अफसोस है कौन ऐसा कर सकता है सुलेमान कहीं मुझ पर तो शक नहीं है तुम्हारा यह कह कर वहां से चला जाता है उसके बाद सुल्तान अलाउद्दीन के यहां से एक फरमान आता है सुलेमान शाह के पास कि आपका सिपाही मुझे चाहिए मैं सलजूग देश जाऊंगा इसलिए मुझे सिपाही चाहिए उसके फरमान पर सुलेमान शाह अर्तुग़रूल को इसकी जिम्मेदारी देता है यहां पर अर्तुग़रूल एक चाल चलता है और कुरतुगुलु  के सामने कहता है कि हम फला रास्ते से सुल्तान के पास जायेंगे  यह बात सुनकर कुरतुगुलु  फौरन वहां से उस्ताद पेट्रेसियो  के पास जाता है और यह सब बता देता है और फिर अर्तुग़रूल उस रास्ते से नहीं जाकर दूसरे जगह छुप जाता है और कुरतूगूलू का चाल बेकार हो जाता और वह वहीं पर पकड़ा जाता है उसे पकड़ कर अर्तुग़रूल कबीला लाता है और सुलेमान साह के पास हाजिर करता है तब सुलेमान शाह पंचायत बुलाता है और कुरतुगुलु को गद्दारी पर गद्दारी का इल्जाम साबित हो जाता है तब सुलेमान शाह सब कबीले वालों के सामने उसके सर को तन से एक ही बार में अलग कर देता है और उसे तड़पा तड़पा कर मारता है फिर अर्तुग़रूल सुल्तान के पास जाने के लिए रवाना हो जाता फिर अर्तुग़रूल सुल्तान के काम को अंजाम देकर कबीला वापस लौट आता है