युसूफ अपने गोदामों में गेहूं को पौधा समेत जमा लेता था यह कह कर के कि काहत के समयमवेशियों का भी चारे का जखीरा साथ-साथ हो जाएगा लेकिन माबुदे अमुन (शैतानी खुदा) के गोदामों में सिर्फ गेहूं का ही जखीरा करता था 5 साल के बाद यूसुफ का 5 गोदाम भर गया और सही सलामत था लेकिन शैतानी खुदा की गोदामों में जितने भी गेहूं के दाने रखे थे सब खराब व बर्बाद हो चुके थे यहां तक की जानवरों के खाने तक लायक नहीं था शैतानी खुदा को मानने वाले जादूगर 5 साल के बाद गोदाम खोला तो गेहूं के जगह कीड़े भरा हुआ था और सब गेहूं के दाने को खा चुका था सब सभी जादूगर ने एक मीटिंग किया और फैसला लिया कि रात के अंधेरे में सब गेहूं को नदी में बहा दिया जाए ताकि नागरिकों को पता ना चले क्योंकि अगर पता चल जाएगा तो जो भी बुत परस्ती पर विश्वास रखता था वह भी हमसे भाग जाएगा और हम लोग यूसुफ का मुकाबला नहीं कर पाएंगे आखिरकार जादूगर अजीम के हुकुम पर रात को सब गेहूं दरिया में फेंक रहा था इधर यूसुफ को पता चल गया था की काहेनाने आजिम की सारे के सारे गेहूं बर्बाद हो चुका है और इसको दरिया में फेंक सकता है इसको नागरिकों के सामने लाना है और सच्चाई जाहिर करना है युसूफ बिन मालिक को इनके पहरे में लगाता है और मालिक उनको रंगे हाथ पकड़ कर अगवान के सामने उनकी चालाकी दिखा देता है फिर सब आवाम उन्हें मारने को दौड़ता है लेकिन वह लोग वहां से भाग निकलता है इस तरह 7 साल बीतने के बाद कहत साली की शुरुआती रात में यूसुफ को पता चल जाता है की चाहत की निशानी बादशाह की बेतहाशा भूख से शुरू होगा बहरे हाल रात के 12:00 बजे युसूफ महल पहुंचता और सभी को बादशाह के लिए लजीज खाना बनाने को कहता है खाना तैयार होते होते बादशाह को अचानक पेट में दर्द आता है और वह बिस्तर से उठ कर बैठता है उसकी पत्नी बादशाह से पूछता है क्या बात है बादशाह कहता है मेरे भूख के मारे पेट में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है लेकिन इतनी रात को यह कैसा भूख है समझ नहीं पा रहा हूं तभी युसूफ वहां आ पहुंचता है और कहता है बादशाह सलामत आपके लिए खाना तैयार है बादशाह हैरान देखता रहता है और कहता है युसूफ तुम्हें कैसे पता चला युसूफ कहता है मेरे खुदा ने मुझे बताया काहात की शुरुआत इस रियासत के नागरिकों को रात में बेतहाशा भूख से शुरू होगा इसलिए मैंने पहले ही आकर आपके लिए खाना तैयार कर लिया बादशाही यूसुफ का बहुत ज्यादा शुक्रिया अदा करता है और कहता है या नबी ए खुदा मैं आपका बादशाह भी हूं और गुलाम भी तकरीबन 2 साल के बाद सभी के पास अनाज की किल्लत होने लगी और यूसुफ के शर्त के मुताबिक गोदाम से अनाज का बंटवारा शुरू कर दिया गया लेकिन बुत परस्ती के जितने भी पंडित थे उन सभी का भी गेहूं खत्म हो चुका था लेकिन वह यूसुफ के पास जाने में हिचकीचा रहे थे पंडितों के अजीम के कहने पर पंडितों ने गेहूं लाने के लिए युसूफ के गोदाम गए लेकिन उन्हें 3 गुना कीमत लेकर गेहूं दिया गया वह लोग वहां पर बहुत विरोध किया कि हम लोगों से 3 गुना कीमत क्यों लिया जा रहा है लेकिन उन सबके बातोंपर कोई भी सिपाही ध्यान नहीं देता है और वह लोग गेहूं लेकर चला जाता है फिर गेहूं खत्म होने के बाद फिर जाता है और इस बार बहुत ज्यादा विरोध करता है उनके विरोध करने पर युसूफ वहां पहुंचता है और कहता है आप लोग उस कीमत पर ले सकते हैं तो ले नहीं तो आपकी मर्जी वह लोग वहां से गुस्से में चल देता है फिर पंडितों के अजीम बादशाह के पास जाता है और यूसुफ का शिकायत करता है लेकिन बादशाह भी उसे वहां से फटकार कर भगा देता है तब वह लोग पड़ोसी रियासत से गेहूं लाने का सोचता है लेकिन वहां भी कहत साली से अनाज की किल्लत रहती है और गेहूं नहीं मिलता फिर गुस्से में आकर पंडितों के कुछ सिपाही भी रहते हैं उन सिपाही यूसुफ के गोदाम को लूटने का मंसूबा बनाता है और अचानक गोदाम में हमला कर देता है बहुत सारे सिपाही को जख्मी कर देता है लेकिन यूसुफ को पता चल जाता है युसूफ भी अपने सिपाही लेकर वहां पहुंच जाता है और उन लोगों के कुछ सिपाही पकड़े जाते हैं और कुछ भाग जाते हैं यह खबर सुनकर बादशाह गुस्से से लाल पीला होकर अपने सिपाही को हुकुम देता है कि जितने भी बुत हैं सब को तोड़ डालो और सभी पंडितों को पकड़कर ले आओ सिपाही जाता है और उन लोगों से मुकाबला करके उनके सारे सिपाही को मार देता है तब पंडित जो अलमारी में मूर्तियां रखी थी उसके सामने सब खड़े हो जाते हैं और कहता है कि हम हमारे खुदा को तोड़ने नहीं देंगे लेकिन बादशाह के सिपाह सलार नहीं मानता है और उसे तोड़ने के लिए आगे बढ़ता है उसी वक्त युसूफ सभी वहां आता है युसूफ को आते देख पंडितों के सर बरा यहां एक चालाकी दिखाता है और अचानक मूर्तियों वाली अलमीरा को बंद कर देता है फिर यूसुफ अलमीरा खोलता है लेकिन अलमारी मूर्तियां गायब हो जाता है तब सभी पंडित जोर-जोर से कहने लगता है कि हम लोगों का खुदा अब तुम लोगों से बदला लेगा यह माजरा देख सभी सिपाही घबरा जाता है और सोचता है कि हम लोगों ने गलती की है और हम लोगों को शैतानी खुदा जरूर सजा देगा क्योंकि उस रियासत का बादशाह से लेकर सभी सिपाही शैतान के पुजारी थे तभी युसूफ अलमारी के अंदर घुसता है तो अलमारी हिलने लगता है क्योंकि अलमारी में चक्का लगा होता है फिर यूसुफ नीचे आकर अलमारी को पीछे घास का देता है और अलमारी के नीचे जोर से फायर मारता है पैर मारते हैं वहां पर एक छेद हो जाता है फिर हाथ से उसे हटाने के बाद देखता है कि जो पंडित उस मूर्ति को पकड़े हुए उस गुफा में छिपा हुआ है सब युसूफ हंसने लगता है और कहता है देखो तुम्हारा खुदा ऊपर नहीं मिट्टी के नीचे चला गया है मिट्टी के नीचे से यह कैसे बदला लेगा यह माजरा देख सभी सिपाही बहुत गुस्से में आ जाता है और पंडितों को पकड़ कर मारने लगता है और कहता है तुम लोगों ने पूरे रियासत के आदमी को बेवकूफ बनाया और नकली खुदा के आड़ में अपना पेट पालते रहे तुम लोग इस तरह सभी को कारागार में कैद कर दिया फिर कुछ दिनों के बाद यूसुफ के पास खबर आता है की कैनान के 10 भाई मिस्र में दाखिल होना चाहता है वह लोग गेहूं लेने आए हैं और उन लोगों के साथ कुछ आदमी और हैं 10 भाई का जिक्र सुनते ही युसूफ कहता है मालिक आप जाएं और 10 भाई को बड़े ही अदब से मेरे यहां लेकर आए और कहे उन लोगों को कि आप मिस्र के अजीज का मेहमान है 10 भाई यह सुनकर अचंभित होता है और सोच में पड़ जाता है अंदर अंदर डरता भी है की अजीज का क्या मंसूबा है पता नहीं उन लोगों को लाकर मेहमान नवाजी करता है लेकिन अपना परिचय नहीं बताता और कहता है की तुम लोगों के परिवार में और कौन-कौन है वह लोग कहता है कि हमें गारा भाई हैं और एक बूढ़ा बाप है युसूफ कहता है तुम अपने उस भाई को क्यों नहीं लाए हो 1 हिस्सा गेहूं ज्यादा मिल जाता ठीक है अगली बार आओगे तो उसे भी साथ लाना नहीं तो तुम लोगों को गेहूं नहीं दिया जाएगा फिर उन लोगों को वहां से यह हूं दे कर भेज देता है और मलिक को कह कर उनके पैसे गेहूं के बोरे में वापस कर देता है प्यासा भाई गेहूं लेकर अपना घर पहुंचता है और सारा वाकया अपने बाप को बताता है यह वाक्या सुनकर याकूब अलैहिस्सलाम कहता है अजीज मिस्र का मंसूबा ठीक नहीं लग रहा और भी सोच में पड़ जाता है जब गेहूं के बोरे से वह पैसा मिलता है जो इन लोगों ने गेहूं की कीमत अदा किया था कुछ दिनों के बाद गेहूं खत्म हो जाता है फिर मिश्र जाने को यह लोग मजबूर होता है लेकिन मिस्र के अजीज के शर्त को अपने बाप को बताता है तो याकूब अलैहिस्सलाम कहता है कि मैं विनियामीन कोतुम लोगों के साथ हरगिज़ नहीं भेजूंगा तुम लोग जो युसूफ के साथ किए हो वह अभी तक मैं भुला नहीं पाया हूं सब सभी भाई कहता है अगर बिन यामीन को नहीं भेजेंगे तो अजीज मिस्र हम लोगों को गेहूं नहीं देगा यह उनका सर्त था इस हालत में हम लोग क्या करेंगे याकूब अली सलाम कहता है अगर तुम सब भाई अल्लाह से वादा करो कीबिन्यामीन को सही सलामत वापस लाएंगे यह सुनकर सभी भाई अपने बाप के हाथ में हाथ रख कर अल्लाह का कसम खाता है और कहता है अगर बिन्यामीन को वापस ना ला सके तो हम लोग भी वापस नहीं आएंगे अपनी जान से ज्यादा उनकी हिफाजत करेंगे इस वादा पर बिन्यामीन को उन लोगों के साथ मिस्र भेज देता है फिर सभी भाई मिस्र के लिए रवाना होता है उधर युसूफ अपने सिपाही को हुकुम दे रखा था की जब भी केनान के 11 भाई आए तो उन्हें इज्जत के साथ मेरे पास लेकर आए रवाना होने से पहले याकूब अलैहिस्सलाम अपने बेटे सबको एक नसीहत किया की अजीज मिस्र का मंसूबा ठीक नहीं है लिहाजा तुम लोग एक दरवाजे से मिस्र में दाखिल ना होना मिश्रा पहुंचकर सब अलग-अलग मत जाना अपने बाप की बात पर सभी 11 भाई अलग अलग हो जाता है और अलग-अलग दरवाजे से मिस्र में दाखिल होता है इधर युसूफ सिपाही से पूछता है क्या अभी तक नहीं आया है वह लोग सिपाही कहता है अभी तक नहीं फिर यूसुफ मलिक को कहता है मलिक अब तक तो वह लोगों को आ जाना चाहिए था आप मिस्र में उन लोगों को तलाश करें मलिक वैसा ही करता है और उन लोगों को खोजते खोजते आखिरकार गेहूं के गोदाम के बाहर सब भाई अलग-अलग लाइन में गेहूं लेने के लिए खड़ा रहता है लेकिन मलिक उन्हें पहचान लेता है और सबको इज्जत के साथ यूसुफ के पास ले आता है तब सभी भाई आपस में कहता है की चलो अल्लाह को यही चाहिए था कि हम लोग अजीज मिस्र के पास जाएं नहीं तो एहतियात करने के बावजूद हम लोग उनकी नजर में आ गए बाहर हाल यूसुफ के पास पहुंचकर सभी भाई को खाने के लिए दिया जाता है उन सबके साथ युसूफ भी बैठता है और कहता है आप सभी भाई अपने अपने मां के हिसाब से बैठे यानी जो भाई एक माता है वह एक साथ बैठे इस तरह 10 भाई तीन हिस्सों में बैठ जाता है लेकिन बिन्यामीन अकेला खड़ा रह जाता है तो यूसुफ पूछता है की तुम्हारा कोई भाई नहीं है बिन्यामीन कहता है मेरा एक भाई युसूफ था जो बचपन में हमसे बिछड़ गया युसूफ कहता है ठीक है तुम बुरा नहीं मानो तो मेरे साथ बैठ सकते हो इस तरह दोनों भाई चालाकी से एक जगह खाने को बैठता है और खाने के दौरान युसूफ अपना परिचय अपने भाई को बता देता है लेकिन यूसुफ कहता है कि सब्र रखो ताकि उन 10 भाइयों को अभी पता नहीं चले बिन्यामीन वैसा ही करता है फिर यूसुफ खाना खाकर वहां से अपने रूम में चला जाता है अंदर जाकर अपने बच्चे को भेजता है जाओ और कहो कि बिन्यामीन को पापा ने बुलाया है यह सुनकर सभी 10 भाई डर जाता है की बिन यामीन को अकेले अंदर क्यों बुलाया कहीं अजीज मिस्र का इरादा नापाक तो नहीं उधर यूसुफ अपने भाई से गले मिलता है और कहता है की अल्लाह का मर्जी है कि तुम भी यहां रुक जाओ बिन्यामीन कहता है अगर मैं यहां रुक जाऊं तो बाबा जुदाई सहन ना कर सकेगा युसूफ कहता है आप घबराएं नहीं अल्लाह की मर्जी है कि दोनों इस्माइल कि जब तक बाबा कुर्बानी नहीं देंगे तब तक उनकी मुलाकात दोनों इस्माइल से नहीं होगा बिन्यामीन कहता है ठीक है जैसा तुम चाहो तो यूसुफ कहता है अभी
तुम जाओ उन लोगों के साथ रहो इस तरह उन लोगों को वहां से विदा कर देता है लेकिन यूसुफ के कहने पर मलिक एक प्याला को बिन्यामीन के बोरी में चुपके से डाल देता है और मिस्र से बाहर निकलते ही सिपाही उन्हें जाकर घेर लेता है और कहता है अजीज मिस्त्र का एक कीमती प्याला चोरी हो गया है उन्हें शक है कि वह आपही में से किसी के पास हैं इसलिए हमें आप लोगों की तलाशी लेना है वह सब कहता है यह कैसा इल्जाम है यह मेहमान नवाजी का यही सिला है आप लोग तलाशी ले सकते हैं सिपाही बारी बारी से सब का सामान तलाश करता है लेकिन बिन्यामीन के सामान से वह प्याला मिल जाता है प्याला मिलते ही युसूफ भी वहां आ पहुंचता है फिर कहता है की तुम्हारे यहां चोरी करने का सजा क्या है वह 10 भाई कहता है चोरी करने का सजा 4 साल तक गुलामी है तब यूसुफ कहता है इस हिसाब से मैं बिन्यामीन को अपना गुलाम में लेता हूं बिन यामीन को लेकर वहां से चला जाता है यह 10 भाई परेशान अपना घर भी नहीं जा सकता क्योंकि अपने बाबा से वादा किया था फिर एक भाई मिस्र में रुक जाता है बाकी सामान लेकर अपना घर वापस जाता है उधर बिन्यामीन को ना पाकर याकूब अलैहिस्सलाम का हालत और खराब हो जाता है और अपना आंखों की रोशनी खो देता है
