प्रेम कहानी यूसूफ अलैहिस्सलाम कि | जीवनी,वकिया part 2
कुछ दिनों के बाद उस कारागार में दो कैदी और भी था उसी रियासत एक बादशाह को शराब पिलाया करता था उसका नाम बनू था और दूसरा का नाम मुजलिस था जो बादशाह का खाना तैयार करता था एक रात दोनों सपना देखता है बानू देखता है कि उनके हाथ में दो अंगूर का गुच्छा थे उनको निचोड़ कर बादशाह को खिला रहे थे और मुजलिस देखता है कि उनके सर पर रोटी के तीन डब्बे थे और ऊपर के डिब्बे से परिंदे रोटी नोच नोच कर खा रहे थे जब सुबह हुआ दोनों बहुत परेशान था लेकिन दोनों से यूसुफ की दोस्ती हो गई थी जब युसूफ उसके पास पहुंचता है दोनों परेशान बैठा रहता है परेशान देख युसूफ पूछता है क्या बात है तुम दोनों बहुत ज्यादा परेशान नजर आते हो तब दोनों अपने अपने ख्वाब का जिक्र यूसुफ के सामने बयान करता है और कहता है समझ नहीं आता इसका मतलब क्या है युसूफ अलेह सलाम कहता है अगर मुझ पर भरोसा करो तो मैं इसका ताबीर बता सकता हूं बहरे हाल युसूफ अलैहिस्सलाम बनु को कहता है कि तुम्हारा ख्वाब का मतलब तुम्हें बादशाह माफ करके फिर से तुम्हें अपने पास रखेगा की और मजलिस को कहता है कि तुम्हारा ख्वाब का मतलब कि तुम्हें बादशाह सलामत चौराहे पर फांसी की सजा देगा और तुम्हें परिंदे नोच नोच कर खाएंगे थोड़ी देर के बाद बादशाह का फरमान आता है और दोनों कैदी को कारागार से बादशाह के सामने पेश करता है आखिरकार यूसुफ अलैहिस्सलाम की ख्वाब की ताबीर सही होता है और बिल्कुल वैसा ही होता है जो यूसुफ अलेही सलाम उस ख्वाब की ताबीर क्या थाबनू को बादशाह अपने पास रख लेता है और मुजलिस को चौराहे में फांसी का सजा दिया जाता है और उसे चिड़िया नोच नोच कर खाता है इधर जुलेखा यूसुफ के गम में पागल हो जाता है और कुछ ही दिन बाद जुलेखा के पति बादशाह की मौत हो जाती है फिर दूसरा बादशाह तैयार होता है और जुलेखा को महल से बाहर फेंक देता है जुलेखा पागल हालत में दरबदर भटकता रहता हैकुछ साल बाद बादशाह एक रात सपना देखता है कि सात मोटी तगड़ी गाय नील नदी से उठ कर चरने लगता है फिर सात पतली दुबली गाय नील नदी से उठ कर उन मोटी गायों को खा जाता है सुबह होते ही बादशाह परेशान रियासत के सभी जादूगर और बड़े बड़े पंडित को बुलाया और अपने सपना की ताबीर पुछा लेकिन सब नकाम रहे और कहा इसका कोई ताबीर नहीं लैकीन दुसरी रात फीर सपना देखता है की सात हरे भरे गेहूं का बलीया को सात सुखे बलि के गरमी से वह भी सुख जाता है फीर बादशाह परेशान जदुगर को बुलाता है और कहता है दोनों रात का सपना महज बेकार नहीं हो सकता इसका कीसी भी हलात में हमको ताबीर चहिए नहीं तो सबको करागार में डाल दूंगा सब जादुगर परेशान लेकिन कीसी भी जादूगर पंडित ताबीर बताने में नकाम रहा और बादशाह सबको करागर में डालने का हुक्म देता है तभी बनु जिसका ताबीर यूसुफ ने किया था बादशाह की बीबी को कहता है की मैं इसके बारे में कुछ कहना चाहता हूं लेकिन बादशाह कि बीबी उसे फटकारता है लेकिन वह फिर कहता है मुझे एक मोका दीजिए बादशाह कि बीबी कहता है सोच लो अगर नहीं बता पाये तो मारे जाओगे कहता ठीक है तभी बादशाह कि बीबीकहता है रुक जाऐ और इन सबको झोड़ दे बनु कुछ कहना चाहता है फीर बादशाह जोर जोर से हंसते हैं और कहते हैं कि अब मेरा नोकर मेरे ख्वाब का ताबीर बताएंगे फीर बनू सेकहता है कि जल्दी बताओ बनू कहता है बादशाह सलामत मैं एक ऐसे शख्स को जानता हूं और मुझे याकीन है इसकी ताबीर वही बता सकता है जब मैं करागर में था तब मैं और मुजलीस ने सपना देखा था और इसका की भी ताबीर उन्होंने ही बताया था जो कि एक दम सही था उन्होंने कहा था कि मुझे माफ कर दिया जयेगा और मुजलीस को परीन्दे नोच खाऐंगे यह सून बादशाह कहता है जल्दी जाओ और मेरे ख्वाब का ताबीर ले आओ बादशाह की हुक्म से बनू करागर जाता है और यूसुफ से उस ख्वाब की ताबीर ले आता है और बादशाह के सामने पेश करता है की सात मोटी गाय और सात हरे भरे गेहूं की बलरी का मतलब सात साल तक अल्लाह की रहमत बरसेगी अगर पत्थर पर भी अनाज बोऐंगे तो होगा और सात पतली दुबले गाय मोटे तगड़े गाय को खाने का और सात गेहूं के बलरी सुख जाने का मतलब सात साल काहात का जमाना होगा इनसान और जानवर सब खाने को तरसेंगे यानी 7 साल रहमत का साल होगा और 7 साल काहत साली होगा बहरे हाल यह सुनकर बादशाह खुशी से झूम उठा और कहां यही मेरे ख्वाब की ताबीर है जाओ कारागार से यूसुफ को अभी लेकर आओ मैं उनसे मिलना चाहता हूं फिर बनो वहां से सिपाही के साथ कारागार का रुख करता है कारागार पहुंचकर यूसुफ को कहता है तुम्हारे ताबीर से बादशाह बहुत खुश है और तुम्हें आजाद कर दिया है लेकिन यूसुफ कहता है क्या आप जाओ और बादशाह से कहें कि मेरे ऊपर जो इल्जाम है मैं उसको मिटाए बगैर कारागार से नहीं जाऊंगा और कहना कि आप थोड़ा सा मालूम करें कि आपके रियासत में औरतों का हाथ का उंगली काटने का माजरा क्या था इसी से मेरा बेगुनाही साबित हो जाएगा बनो वैसा ही करता है बादशाह को जाकर कहता है कि यूसुफ ने यह शर्त रखी है फिर बादशाह हंसने लगता है कि यह कैसा इंसान है बादशाह के आजाद करने पर भी कारागार से निकलना नहीं चाहता ठीक है मैं इसका पता लगाता हूं और सिपाहियों को हुकुम देता है कि जो सब औरत जुलेखा के दावत में शरीक था सब को हाजिर किया जाए सिपाही सब को पकड़ कर यहां तक कि जुलेखा को भी पकड़ कर बादशाह के सामने पेश किया जाता है बादशाह उन औरतों से पूछता है उंगली काटने का माजरा क्या है लेकिन सब औरत चुप रहता है फिर बादशाह जुलेखा को कहता है बताओ जुलेखा क्या माजरा था तो जुलेखा सारी सच्चाई बोलने पर मजबूर हो जाता है और यूसुफ की सच्चाई का गवाही उन सब औरतों में भी बादशाह के सामने रख दिया फिर बादशाह सभी औरतों को बंधक बनाने का हुक्म देता है फिर वनों को सिपाही के साथ यह सब को लाने भेजता है बनो कारागार पहुंचता है और यूसुफ को यह खबर देता है कि तुम बेगुनाह हो तुम पर लगे इल्जाम पूरे रियासत के सामने तुम पर से हटा दिया गया है और उन सब औरतों को कैद कर लिया गया है बादशाह तुमसे मिलने को बेकरार है जल्दी चलें फिर वहां से यूसुफ चल पड़ता है महल पहुंचने के बाद युसूफ कहता है मेरा कपड़ा गंदा है मैं थोड़ा फ्रेश हो जाऊं तब बादशाह से मुलाकात करेंगे थोड़ी देर के बाद बादशाह के हाजिर होता है लेकिन अपना सर नहीं झुकाते क्योंकि अल्लाह के अलावा किसी के सामने सर नहीं झुकाना चाहिए फिर बादशाह को याद आता है जब बादशाह बच्चा था युसूफ भी बच्चा था तभी यूसुफ को महल में देखा था उस वक्त भी सर नहीं झुकाया था लेकिन तभी उसे बच्चा समझ कर उस वक्त का बादशाह कुछ नहीं कहा था फिर बादशाह यूसुफ को कहता है कि तुम्हें याद है जब तुम बच्चे थे तुम्हें महल में देखा था मैं तब भी तुम सर नहीं झुकाया था और आज भी नहीं वही तेवर है तुम्हारा युसूफ कहता है मैं सिर्फ एक खुदा पर भरोसा करता हूं और उसी का पूजा करता हूं उसके अलावा किसी के सामने सर झुकाना जायज नहीं बादशाह कहता है ठीक है मेरे ख्वाब की ताबीर तो तुमने बता दिया इसका उपाय भी बताएं कि कैसे उस काहत साली से निजात पा सके युसूफ कहता है बादशाह सलामत आने वाली 7 साल ज्यादा से ज्यादा मेहनत करके अनाज उगाया जाए और उसे जखीरा कर लिया जाए ताकि कहत की 7 सालों में उस जखीरे से गुजारा हो जाए तब बादशाह कहता है बहुत खूब इसके लिए हमें तुम्हें अपना वजीर मंत्र कब करता हूं जैसा मुनासिब हो तुम करोतब यूसुफ बादशाह का शुक्रीया करता है और कहता है कि मेरा आप से एक गुजारिश है कि उन औरतों को छोड़ दिया जाए और करागार मे जो कैदी है उसे भी रीहा कर दिया जाए बादशाह कहता है औरतों को माफ करके तुम मेरे नजर में और महान हो गए हो लेकिन कैदियों को लेकर मैं कुछ समझा नहीं खतरनाक कैदियों को कैसे रिहा किया जाए तब युसूफ कहता है अब वाह कैदी सुधर गए हैं उनका जिम्मा मैं लेता हूं तो बादशाह कहता है ठीक है जैसा तुम चाहो तभी बादशाह का मां कहता है कि तुम पागल हो गए हो एक तो रियासत को अजनबी के हाथों सौंप दिया फिर उन खतरनाक कैदी को रेहा करने की बात करते हो बादशाह कहता है मां आप चुप रहे फिर युसूफ कारागार जाता है और सभी कैदियों को रिहा कर देता है फिर सभी कैदियों को कहता है कि देखो मैं अपने जिम में से तुम लोगों को रिहा करवाया हूं मुझे शर्मिंदगी करने का मौका ना दें तब सभी कैदी कहता है की आप जो कहेंगे वही करेंगे और हम लोग आपको छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे फिर वहां पर अचानक मालिक पहुंचता है जो यूसुफ को मिस्र लाकर बेचा था मालिक युसूफ से अपनी माफी का तलब गार करता है और कहता है मैंने आपके साथ बहुत गलत किया है मुझे माफ कर दे तब यूसुफ कहता है मैं आपको तभी से ही माफी दे चुका हूं बाहरी हाल आप यहां पर क्या कर रहे हैं मालिक कहता है मैंने आपको खोजते खोजते सब कुछ खो चुका हूं मेरे पास कुछ भी नहीं है अब मैं आपका गुलाम बन कर रहूंगा तब यूसुफ कहता है ठीक है हमें मिलकर एक बहुत जरूरी काम करना है जो मुझे बादशाह ने सौंपा है मुझे 7 साल का गेहूं जखीरा करने के लिए 7 गोदाम बनाना है उसमें आप सभी की जरूरत है तो चले आज से ही इस काम को अंजाम दे इस तरह युसूफ गोदाम की तामीर करना शुरू कर देता है फिर पूरे रियासत में एलान किया जाता है आप लोग ज्यादा से ज्यादा खेती करें और अनाज को सरकारी गोदाम में जमा करें जो फ्री में अनाज जमा करेगा उसे कहत साली में फ्री में अनाज दिया जाएगा और जो कीमत लेकर अनाज जमा कराएगा उसे काहाथ साली के समय कीमत देकर अनाज दिया जाएगा और जो शहरी और अमीर है उसे डबल कीमत पर अनाज मुहैया कराया जाएगा लेकिन शैतान की पूजा करने वाले नागरिकों को भड़काता है और कहता है एक अजनबी पर भरोसा मत करो वह तुम सबको कुछ नहीं देगा आप सब माबुदे आमुन(यानी शैतानी खुदा) की गोदामों में अनाज जमा करें लेकिन मिस्र के 80 फीसद नागरिक यूसुफ के गोदामों में अनाज जमा करता है क्योंकि कहतसाली का ताबीर यूसुफ ने बताया था

