URTUGRUL GAZI EPISODE 03

                           URTUGRUL GAZI EPISODE 03

 कारातोयगर ने फिर एक गिरा हुवा  साजिश करता है और कबीले में एक जासूस खोजता है जाशुषि करने के लिए और उसे जासूस बिना परेशानी के ही मिल जाता है सुलेमान शाह के मुंह बोलै भाई कुर्तुगुलु कुर्तुगुलु कबीले का खबर करतोयगर को पहुंचता है और सहजादे नुमान का शिविर का पता बताता है तो करतोयगर ने रात में 



चुपके से कुछ सिपाही को भेजते हैं की जाओ और कबीला से सहजादे नुमान को पकड़ कर चुपके से लावो लेकिन उसकी भनक दामिर उस्ताद को लग जाता है और रात भर शिबिर के बाहर चुपके से पहरा करता है और जैसे ही करतोयगर के सिपाही आते हैं उस पर टूट पड़ता है और सब को मार डालता है !

उस समय (कई कबीला)  जहाँ बसा हुवा था वहां बहुत कहत शाली था इसलिए वहां से दूसरी जगह बसने के लिए जमीन की खोज में सरदार ने अर्तुग़रूल को हलफभेजा और सुलतान से जमीन मांगने को कहा अर्तुग़रूल ऐसा ही किया लेकिन सुल्तान से जमीन मांगने पर सुल्तान ने एक शर्त रखी की उसके बदले में हमें किया मिलेगा तो अर्तुग़रूल ने  कहा आप की सल्तनत ईसाई के नजर में हैं कभी भी युद्ध आप पर आ सकता है खुदा न करे अगर ऐसा हुवा तो हमारे 2000 जंगबाज और कई कबीला आप के साथ हैं आखिर में हलफ के सुल्तान अपने चाचा वजीर शहाबुद्दीन के मशवरें से जमीन देने का वादा करता है इधर सुलेमान सह अपने बड़े बेटे गुणदुगदु को कबीला का कुछ शमान बेचने के लिए बाजार भेजता है और सुरक्षा के लिए कुछ सिपाही! इसकी भी खबर कारातोयगर को उसके जाशुष  कुर्तुगुलु देता है तो कारातोयगर ने रास्ते में उन पर हमला कर देता है और सब लूट लेता है और सब सिपाही को मर डालता और गुणदुगदु और हमजा को अगवा कर लेता है फिर  हमजा को घोड़े में बांध कर कबीला भेज देता है की जाओ अपने सरदार से कहना की अपने बेटे को जिन्दा चाहिए तो शहजादे नुमान को हमारे हवाले कर दो और अपने बेटे को ले जाओ सुलेमान शाह बहुत परेशान हो कर एक मीटिंग बुलाता है और उस मीटिंग में चर्चा होता है की आखिर हमरे यहाँ से पूरी की पूरी खबर उसे कैसे मालूम होता है तभी अर्तुग़रूल कहता है इसके पीछे जो भी है उसे जल्द से जल्द पकड़ना होगा लेकिन पहले भाई को आजाद कराना होगा इस पर चर्चा होता है लेकिन कुछ भी फैसला नहीं होता है और सारा गलती अर्तुग़रूल का बताते हैं की इसकी वजह से ऐ सब हो रहा है  फिर रात में अर्तुग़रूल अपने पिता से मश्वरा करता है उस मश्वरे में आप्सीन पासा शहजादा नुमान का सिपाही और नुमान भी रहता है उसमे अपशिन पाशा एक मश्वरा देता है की आप उसकी बात मान कर नुमान को उसके हवाले करने को तैयार हो जाएँ बांकी मैं सम्भाल  लूंगा ऐसा ही कुछ होता है उससे पहले अपशिन पाशा अपने दोस्त कारातोयगर के वजीर से मिलता है और शहजादे नुमान के बारे में सब बताते हैं  कारातोयगर के वजीर अपने दोस्त का साथ देने को तैयार हो जाता और नुमान और गुणदुगदु को अदला बदली के दौरान कारातोयगर के सारा सिपाही अपने वजीर के कहने पर बगावत कर देता है और इस तरह कारातोयगर पकड़ा जाता है !