URTUGRUL GHAZI EPISODE 1
अर्तुग़रूल गाज़ी 13 वीं सदी के काई जनजाति (काई कबीला तुर्की )की इतिहास से मूल इकाईयों का एक शानदार कहानी है ईमान इनसाफ और मोहब्बत की रोशनी से लिख्खी एक बहादुर जंगबाज की कहानी जिसने अपने सही कदम और जरुरत से न सिर्फ अपने कबीले बल्कि तमाम इस्लामी दुनिया की तक़दीर बदल डाली काई जनजाति तुर्की के खाना बदोश (काई कबीला ) को एक ऐसे देस की तलाश थी जहाँ उसके नस्ले बड़े हो और खुशहाल जिन्दगी गुजारे लेकिन सुलेमान शाह के बहुत कोशिश के बाउजुद वैसा देश नहीं मिला आखिरकार सुलेमान शाह के बेटे अर्तुग़रूल
अर्तुग़रूल बचपन से ही बहुत बहादुर था औ
र उसे बचपन से ही तलवार बाजी शिकार करना
तीर धनुष चालाने का शौक़ीन था उसके साथ साथ अर्तुग़रूल के पिता सुलेमान शाह के शहीद सिपाही के बेटे (बन्शी) (तुर्गुद) (दुवान) और अर्तुग़रूल एक साथ खेल कूद कर जवान हुए और अर्तुग़रूल ने इन को अपने भाई के तरह अपने साथ रखता इन्होने भी जवान हो कर बहुत बहादुर जंगबाज बना !

