Islamic kahani,हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह,ka jabardast, kissa,part1
हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह अपने कुछ सिपाही के साथ जंगल में भटक गए असर के वक्त से सूरज डूबने के तरफ जा रहा था सुल्तान जंगल में रास्ता
खोज करने में लगा था एक हिंदू धर्म की शहजादी पर नजर पड़ी जो अपनी खादिमा के साथ शायद शिकार पर निकल आई थी अकेली शहजादी और इसकी कनीज इस चीज से बेखबर नदी के किनारे अपने पांव लटकाए बैठी थी इनके पीछे एक जंगली जानवर पहुंच चुका था इस वक्त तक के सुल्तान का तीर इसके गर्दन से आर पार होता वह शहजादी की कनीज को एक हाथ के पंजे से नोच चुका था इससे पहले शहजादी अपना धनुष संभालती और तीर कमान में लगाती शायद बहुत देर हो जाती और अपनी कनीज को बचा न पाती इससे पहले सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह ने एक के बाद एक 3 तीर इस जंगली दरिंदे पर दे मारे जिससे वह गिर गया शहजादी को यह जान ने मैं मुश्किल ना हुई के इस महारत और कारनामा का मुजाहेरा कोई जंगबाज सिपाही ही कर सकता है शहजादी सुल्तान के तरफ गया और अपनी पहचान देते हुए बोली मेरा नाम समरती है मैं जयपुर रियासत के राजा की इकलौती बेटी हूं मेरी जान बचाने का धन्यवाद मैं तुम्हें अपने पिता से कहकर फोज में कोई बड़ा पोस्ट दिला दूंगी वैसे तुम हमारी फौज के सिपाही लगते नहीं हो बताओ कहां से वाबस्ता है तुम्हारा समृति शायद यह नहीं जानती थी के इसके सामने कोई मामूली सिपाही नहीं है बल के इस वक्त की सब से ताकतवर इस्लामी लश्कर के सबसे बड़ा सुल्तान महमूद गजनबी है जिनके नाम से ही हिंदू राजाओं के हलक सूख जाते हैं सुल्तान ने अपनी पहचान जाहिर ना करते हुए कहा जी किसी और फोज का सिपाही हूं चलिए मैं आपको कीसी सुरक्षित जगह पर पहुंचा दूं आप मेरे पीछे चलती जाएं अंधेरा बढ़ता जा रहा है रास्ता ना मिला तो शायद इसी जंगल में रात गुजारनी पड़ेगी शहजादी जान चुकी थी के यह इंसान लालच और खौफ से पाक हैं वह सुल्तान की नजरों में शर्म वो हया देखकर खुद को महफूज महसूस कर रही थी जंगल की घना झाड़ियों की वजह से शहजादी का कुर्ता बहुत सी जगह से फट चुका था शहजादी बहुत थक चुकी थी सुल्तान ने शहजादी को एक मजबूत पत्थरों और पेड़ों की तरफ इशारा करते हुए कहा शहजादी आप इधर आराम कर ले रात बहुत हो गई है और मौसम में भी गड़बड़ी है अंधेरे में अभी घने जंगल में यात्रा करना सही नहीं है सुबह निकले तो शायद मैं आपको किसी सुरक्षित आश्थान पर पहुंचा सकूं शहजादी के पास सुल्तान पर भरोसा करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता ना था सुल्तान ने महसूस किया शहजादी अपने फटे कपड़े में जंगल की ठंडी रात शायद ना गुजार सकें सुल्तान ने अपनी मोटी कंबल शहजादी के तरफ फेंक दी और नजरों से शहजादी को देखा जैसे कह रहा है औढ़ ले शहजादी ने देर ना करते हुए चादर औढ़ लिया और पत्थर में सर लगाकर पेड़ों के नीचे सो गए इसकी आंखे सुल्तान के चेहरे की तरफ जमी हुई थी जो आंखे झुकाए एक बड़े पत्थर पर बैठकर आग जलाने की कोशिश कर रहे थे बहुत देर के बाद आखिरकार आग जल गई इस की रोशनी में सुल्तान की नूरानी और भरा हुआ चेहरा खिल रहा था सुल्तान ने मिट्टी से वजू क्या और नमाज पढ़ने लगे शहजादी को झटका लगा अरे यह तो मुसलमान लगते हैं एक दफा शहजादी का कांपने लग गई थी कहीं या गजनी के लश्कर से तो नहीं यह तो लुटेरे हैं गाय भैंस बकरी सबका मीट खाते हैं या मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे लेकिन अगले ही पल शहजादी अब तक इसके साथ गुजरे समय को याद करने लगी अगर यह इतना ही जालिम होता तो मुझे दरिंदे से ना बचाता ना चाहते हुए भी शहजादी का दिल फिर से इत्मीनान व यकीन से भर गया सुल्तान नमाज के बाद दुआ करते वक्त बहुत जोर से रोने लगी रोते-रोते सुल्तान ने अपने चाकू कि नोक अपने पांव के अंगूठे पर रखकर इसको दबा दिया शहजादी देखती रही के यह जवान मर्द मुझसे बात करना नहीं चाहता आखिरकार सुबह सुल्तान ने शहजादी से कहा अब हमें निकलना चाहिए कुछ दूर जाकर सुल्तान को एक सफेद पत्थर पड़ा मिला जो सुल्तान के सिपाही निशानी छोड़े थे रास्ता की पहचान के लिए की रास्ता इसी तरफ है उस जमाने का एक तरीका था के जंगल में पत्थर की निशानी छोड़ते जाते ताकि
