Islamic kahani,हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह,ka jabardast, kissa,part2


Islamic kahani,हजरत सुल्तान महमूद गजनबी रहमतुल्लाह,ka jabardast, kissa,part2
 
पीछे आने वाले रास्ता जान सके गुजरने वाला कहां से इनका साथी गुजरा है आखिरकार शहजादी और सुल्तान एक साथ रास्ता पर आ पहुंचे कुछ दूर एक छोटे से गांव के होने की आभास आ रही थी उस सिपाही ने कहा आप की रियासत की  सीमा का ही गांव मालूम पड़ता है शहजादी हां ऐसा ही लगता है देखते हैं गांव पहुंचने पर शहजादी ने गांव के मुखिया को बुलाया मुखिया अपने कुछ साथियों समेत शहज़ादी के पास हाजिर हुआ शहजादी ने कहा हमें दो तेज रफ्तार घोड़े दे और कुछ सूखा अनाज इस सिपाही को दीया जाए शहजादी ने सिपाही

से कहा अजनबी हमें बहुत हैरत हुई तुम पर आखिर तुम किस मिट्टी के बने हो सारी रात तुम अपने खंजर से अपने जिस्म को काटते रहे और मेरी तरफ कोई तवज्जो ना दी तुम चाहो तो हमारे साथ महल चलो हम तुम्हें इनाम देंगे अपनी जान बचाने के बदले मे सुल्तान ने घोड़े पर सवार होकर शहजादी से कहा शहजादी साहिबा तकलीफ इसलिए दे रहा था के आपका हुस्न मेरे ईमान को बर्बाद ना करें और मेरा ध्यान मेरे दर्द की तरफ रहे आपकी तरफ ना जाये शहजादी क्या तुम्हें यह मौका गंवाना चाहिए था हमसे अकेले में मुलाकात के लिए लोग अपनी रियासतें देने को तैयार हैं सुल्तान शहजादी मैं मुसलमान हूं और मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलेही वसल्लम का गुलाम हूं मेरी नजर आपके जिस्म पर नहीं बल्कि खुद मेरी अपनी रूह पर थी शायद मेरे जिस्म से गुनाह का दाग धुल जाता लेकिन मेरी रूह पर इस गुनाह का दाग लेकर मैं अपने नबी पाक के सामने कैसे पेश होता मुझे यह मंजूर नहीं था क्योंकि अल्लाह का शुक्र है मैं एक सच्चा और ईमान वाला मुसलमान हूं शहजादी यह जवाब सुनकर सिपाही के अपने सच्चे मजहब इस्लाम के साथ लगाओ मोहब्बत और ईमानदारी देखकर उनके किरदार से लगाओ के बिना ना रह सके जैसे इसका दिल किसी अंजान आदमी के मजहब और जिंदगी में शामिल होने को तड़प रहा हो यह कह कर सुल्तान ने इजाजत चाहि शहजादी अपना और अपनी फोज का नाम तो बताते जाओ हम याद रखेंगे सुल्तान ने चादर से अपना चेहरा को छुपाया और तीर  कमान को अपने कंधे पर डाला तलवार अपने म्यान में डाली और घोड़े की रस्सी पकड़ते हुए बोले शहजादी मेरा नाम है सुल्तान महमूद गजनबी और मैं ही गजनी की अजीम फौज का वजीर हूं और सुल्तान हूं यह कह कर सुल्तान ने घोड़े पर बैठा और सर पट दौड़ाते हुए आंखों से गायब हो गई और शहज़ादी अचंभित हो कर देखता रहा