ISLAMIC KAHANIYAN Jannat Ka Bazaar...............................
हदीस11 :-- हजरत अनस रजि अल्लाह ताला अनु से रिवायत है कि जनाब रसू0 ने इरशाद फरमाया:
जन्नत में एक बाजार होगा जिसमें कस्तूरी के पहाड़ होंगे हर जुमा को जन्नती वहां जाएंगे और उत्तरी की हवा चलेगी जो उनके चेहरों और मलबूसात पर पड़ेगी तो वह लोग हुस्न जमाल में बढ़ जाएगी और अपने घरवालों की तरफ लौटेंगे उनका हुस्नो जमाल बहुत बढ़ चुका होगा उनकी बीवियां उनसे कहेंगे कसम खुदा की हमारे बाद आप हजरात हुस्नो जमाल में खूब बढ़ गए हो
तो वह कहेंगे और तुम भी तो अल्लाह की कसम हमारे बाद हुस्नो जमाल में बढ़ चुकी हो
जन्नती अपनी शक्ल बदल सकेंगे अपनी मर्जी के मुताबिक
हदीस2 :-- हजरत अली रजि अल्लाह ताला की रिवायत है कि जनाब रसूल0 ने इरशाद फरमाया1 : तर्जुमा जन्नत में एक बाजार है जिसमे
कोई खरीद बिक्री नहीं होगी
बल्कि मर्द और औरत की सकलें होगी जब कोई मर्द किसी शक्ल को पसंद करेगा तो वह अपने आप में उस चेहरे पर हो जाएगा (और उस मर्द की वेसी ही शक्ल हो जाएगी )और वहीं पर हूरें कि भी महफ़िल होगी जो ऐसी ऊंची और खूबसूरत आवाजों में नगमा सराई करेगी कि वैसी नगमा सराय मखलुकात ने ना सुनी होगी वह कहेंगी तर्जुमा5 :--हम हमेशा जिंदा रहेंगे कभी मौत ना होगें हम नेमतों में पलने वाले हैं!
कभी खस्ताहाल ना होंगी हम राजी रहने वाली है अपने खावंदों पर कभी नाराज ना होगी, खुशखबरी और मुबारक हो उसको जो हमारा खावंद है और हम उस की बीवियां हैं
जिस्मों की खुशबू में इजाफा4 :-- हजरत अनस बिन मालिक रजी0 ताला अ0 फरमाते हैं कि जन्नाति आपस में कहेंगे कि चलो जन्नत की तरफ चलें जब वह टीलों या पहाड़ों पर पहुंचेंगे फिर वापस अपनी बीवियों के पास लौटेंगे तो कहेंगे हम तो तुमसे ऐसी खुशबू महसूस कर रहे हैं जो पहले तुमसे नहीं आती थी जब हम तुम हमारे पास से गए थे तो वह कहेंगे आप भी तो ऐसी खुशबू के साथ लौटे हैं जो इससे पहले नहीं आती थी जब तुम हमारे पास से गए थे
बाजार की नेमतें8 :--- हजरत सईद बिन अल मासिब रहमतुल्लाह से मरबी है कि उनकी हजरत अबू हुरैरा रजि0 से मुलाकात हुई तो हजरत अबू हुरैरा रा० अनु ने फरमाया अल्लाह ताला हमें और आपको जन्नत के बाजार में मिला दे तो हजरत सईद बिन अल मासिब ने अर्ज कियाअइ अबू हुरैरा क्या जन्नत में बाजार भी होगा! फरमाया हां6 उस में ऐसी-ऐसी नेमते होंगी जिनको आंखों ने नहीं देखा और ना दिलों में उनका ख्याल आया और ना ही उनको कानों ने सुना है ! बहरेहाल यह जन्नती उस बाजार से जिस चीज का दिल चाहेगा ले लेंगे उस बाजार में लोग एक दूसरे से मुलाकात करेंगे हत्ता के उन लोगों में से हर एक शख्स वह शख्स से भी मुलाकात कर सकेगा जो उससे ऊपर के दर्जा में होगा जबकि उसके लिबास को देखेगा तो उसको घबराहट होगी उसका ताज्जुब अभी खत्म ना हुआ होगा की छोटे तबका के जन्नती को भी वैसा ही लिबास पहना दिया जाएगा या उससे भी ज्यादा खूबसूरत लिबास पहना दिया जाएगा इसलिए के वहां कीसी आदमी के लिए मुनासिब ना होगा की वह जन्नत में गमगीन रहे जैसा की अल्लाह ताला इरशाद फरमाते हैं7 ! अल्लाह ताला कुराने पाक में यह इरशाद फरमाते हैं9 :-- तर्जुमा और (वहां जन्नत में दाखिल होकर) कहेंगे कि अल्लाह का लाख-लाख शुक्र है जिसने हमसे हमेशा के लिए रंजो गम दूर किया है बेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्सने वाला और बड़ा ही कदरदान है जिसने हमको अपने फजल से हमेशा रहने के मुकाम में ला उतारा जहां ना हमको कोई उल्फत पहुंचेगी और ना हम को कोई सामान की कमी पहुंचेगी!
हर वक्त नेमत और शानो शौकत में बढ़ोतरी13 :
हदीस7 :---- हजरत हसन रहमतुल्ला अन्हु रिवायत है कि जनाब रसूलल्लाह सल्ल0 इरशाद फरमाया तर्जुमा जन्नत में एक बाजार है जिसमें कस्तूरी के टीले है जो बर्फ से ज्यादा सादा हैं जब जन्नती हजरात उस टीले में प्रवेश होंगे तो अल्लाह ताला उन पर एक हवा चलाएंगे उस हवा का नाम मसिरह होगा जो उन पर मास्क पासी करेगी फिर जब यह हजरत वहां से लोट कर अपनी बीबियों के पास जायेंगे और उन पर खुसबूदार चमकने दमकने रंगीनियां बिखरती हो रही होंगी तो वह कहेगी की तुम इतना खुबसुरतियों के साथ तो हम से रवाना नहीं हुए थे तो वह कहेंगेर तुम भी तो अल्लाह की कसम हमारे सामने पाकीजगी और हुस्नो जमाल में बढ़ रही हो
खावंद बीबी की पसंदीदा सकलें8 :----
तर्जुमा 1 :----हजरत ओबैद बिन आमिर रहमतुल्लाह से रवायत है की जनाब रसूल0 ने इरशाद फरमाया
तर्जुमा10 :------जन्नत में एक बाजार है जिसमें जनती हजरात के लिए खूबसूरत शक्ल बनाई गई है जन्नतियों में से जब कोई किसी शक्ल को पसंद करेगा तो वह उसी शक्ल में दाखिल हो जाएगा फिर वह अपनी बीवी की तरफ लौटेगा उसको देखेगी तो कहेगी ऐ अल्लाह के बन्दे मैंने आपको आज से ज्यादा खुबशुरत कभी नहीं देखा आप कहां थे तो वह कहेगा मैं औलिया अल्लाह के साथ जन्नत के बाजार में था अल्लाह ताला ने हमारे लिए उस बाजार में हसीन सूरत जमा फरमाई थी हम में से हर एक आदमी ने जो सूरत अपने लिए पसंद की वह इसी शक्ल में तब्दील होकर गया है मैंने भी अपने लिए एक सूरत पसंद की जिसमें अब नजर आ रहा हूं !ऐ अल्लाह की वलि मैं तुम्हें कैसा लग रहा हूं तो कहेगी ऐ अल्लाह के बंदी मैंने आज आपसे ज्यादा कोई चीज खुबशुरत नहीं देखी
अल्लाह के बन्दे अब मैं आपको कैसी लग रही हूं तो वह कहेगा मैंने आज तुमसे ज्यादा हसिन चीज नहीं देखी
