ramjan ke kuch facts /id ul fitr ki puri roje ki jankari /jo aap ko janna jaruri hai







 ramjan facts /id ul fitr ki puri roje ki jankari /जो आप को जानना जरुरी है 

रमजान के महीने लोग रोजे रखता है और अल्लाह ताला को याद करते हैं और पूरे महीने के दौरान रोजे रखते हैं। तीस या उन्तिश  दिनों तक इबादत का दौर चलता रहता  है और फिर ईद मनाई जाती है। ईद के दिन नमाज से पहले गरीब और जरूरतमंदों में फितरा बांटा जाता है यह फ़ित्रा हर आदमी छोटे बड़े पर फर्ज है । यही वजह है कि इस ईद को ईद-उल-फित्र या ईद-उल-फितर कहा जाता है और ईद के दिन मीठी चीज की पकवान बनता है जोसे सेवइयां पव्वा और बहुत तरह की पकवान बनता है ।

फितरा :............ 

 हर एक आदमी पर एक शा यानि लगभग 250 Kg खाने की चीजों से निकल कर गरीबो में बाँटना है ईद का नमाज से पहले ताकि यह जरुरत मंद तक बा अशनि पहुँच सके और वह भी इस खुसी में शामिल हो 

हदीश नबीबी :....... نْ ابْنِ عَبَّاسٍ قَالَ فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ زَكَاةَ الْفِطْرِ طُهْرَةً لِلصَّائِمِ مِنْ اللَّغْوِ وَالرَّفَثِ وَطُعْمَةً لِلْمَسَاكِينِ مَنْ أَدَّاهَا قَبْلَ الصَّلَاةِ فَهِيَ زَكَاةٌ مَقْبُولَةٌ وَمَنْ أَدَّاهَا بَعْدَ الصَّلَاةِ فَهِيَ صَدَقَةٌ مِنْ الصَّدَقَاتِ


1608 या 1609سنن أبي داود كتاب الزكاة باب زكاة الفطر


तर्जुमा :   इब्न अब्बास ने सूचना दी: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया  ज़कात अल-फ़ित्र  रोजे  करने वाले को व्यर्थ की बातों और दुर्व्यवहार से शुद्ध करने के लिए है इसे  गरीबों को दिया जाये  जो कोई ईद की नमाज़ से पहले इसे अदा करता है उसे ज़कात के रूप में स्वीकार किया जाता है और  जो कोई ईद की नमाज के बाद इसका अदायगी  करता है वह स्वैच्छिक दान का हिस्सा है।


1. रमज़ान के पुरे महीने के दौरान हर मुसलमान रोज़े रखता है छोटे बच्चों गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को छोड़कर हर इंसान पर फर्ज है और हैजा औरत के लिए रमजान के बाद उसकी अदायगी का हुक्म है 

2. इस महीने में शाम की इफ्तार का खास भोजन खजूर होता है इसके पीछे की मान्यता है कि पैगम्बर मोहम्मद ने अपने रोज़े भी खजूर खाकर खोले थे और खजूर न होने पर पानी से खोले यह साबित है  

3. रमज़ान का महीना पूरे 30 या 29  दिन का होता है और हर दिन रोज़ा रखा जाता है मान्यता है कि इस महीने हर रोज़ कुरान पढ़ने से ज़्यादा सबाब मिलता है.कियों की अल्लाह ताला ने इसी महीने कुरान पाक की नुजूल फ़रमाया 

4. रमज़ान के महीने को तीन हिस्सा  में बांटा जाता है 10 दिन के पहले हिस्सा को 'रहमतों का दौर' बताया गया है. 10 दिन के दूसरे हिस्सा को 'माफी का दौर' कहा जाता है और 10 दिन के आखिरी हिस्से को 'जहन्नुम से बचाने का दौर' पुकारा जाता है जो इन्शान रमजान के आखरी दस दिन अल्लाह से माफ़ी मांग कर अपनी गुनाह को माफ़ करवाया वह जहन्नुम से बच सकता है 

5. रोज़ा के दौरान हर मुसलमान खाने-पीने के साथ साथ अपनी बीबी से सेक्स  अपशब्द गुस्सा करने से भी परहेज करते हैं और इस दौरान जियादा से जियादा  कुरान पढ़कर और नमाज के जरिए अल्लाह को से माफ़ी माँगा जाता है. 

6. रमज़ान में एक  दिन शब-ए-कद्र होती है इस दिन सभी मुस्लिम रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं. इस रात की इबादत 1000 महीने की इबादत के बराबर है  

7. इस बार रमज़ान में 4 जुमे पडेंगे. रमज़ान का जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है.जो सही नहीं है इसमें कुछ मिलावट है  

8. आपने देखा होगा कि रमज़ान की हर तस्वीर में लालटेन ज़रूर होगा इस लालटेन की सच्चाई  है कि रमज़ान के महीने में मिस्र के बाजारों में लोग बड़ी-बड़ी लालटेन लगाकर सड़कों को सजाते हैं इसके पीछे मान्यता है कि मिस्र के खलीफा का स्वागत राजधानी काहिरा में लालटेन लगा कर किया जाता है यह एक सुन सुनी बात है इसका भी रोजे से कोई ताल्लुक नहीं हैं और यह रसूल की बात भी नहीं है 



9. रोज़े की शुरुआत सुबह सूरज के निकलने से पहले के भोजन से होती है जिसे 'शेहरी ' कहा जाता है और सूरज डूबने के बाद के भोजन को 'इफ्तार' कहा जाता है.

10. रमज़ान को नेकियों का मौसम और मौसम-ए-बहार (बसंत) भी कहा जाता है.कियों की अल्लाह ने इस महीने में जन्नत का दरवाजा खोल देता है और जहन्नाम का दरवाजा बंद कर देता है इसका मतलब इंसान को अल्लाह ताला इस मुबारक महीना दे कर कहता है की जन्नत ले लो हम ने तुम्हारे लिए खोल रक्खा है ! और जो इन्शान नहीं ले सका वह सबसे घाटे में है