younus,alaihissalam,ki kahani/history of younus alayhissalalm,


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younus alayhissalalm,

 अज़ीज़ दोस्तो, हज़रत यूनुस (अलैहि सलाम) को अल्लाह तआला ने क़ौम निनवा की तरफ़ भेजा जो की क़दीम बाबल शहर के पास का एक शहर था  यूनुस (अलैयहे सलाम) का ज़माना ईसा (अलैयहीस सलाम) से तिक्रीबान 800 साल पहले का है।  ये क़ौम भी बूत परस्त थी और उन्होंने लगभग 1,00,000 बनी इसरायल को क़ैद कर के राखा था  यूनुस (अलैहीस सलाम) ने 7 साल तक हक की दावत दी यानि की तबलीग की  लेकिन जब उनकी कोम पर इस दावत हक का असर ना हुवा और वोह अपनी बूत परस्ति मी लागे रहे तो यूनुस (अलैहिस सलाम) ने आखीर मे अल्लाह ता'अला के आजाब की धमकी दे दी, उन्की कौम ने फिर भी परवाह नहीं की
जब अज़ाब का मुक़र्रर्रह वक़्त क़रीब आ गया और आज़ाब के आसार नाज़र ना आए  तो यूनुस (अलैहीस सलाम) अल्लाह तआला की इजाजत के बगैर ही अपनी क़ौम को छोड़ कर चले गए। जैसे ही यूनुस (अलैहीस सलाम) झोड़ कर चले गये  तो उनकी कौम पर अजाब का असर नजर आने लगे, काले काले बादल छा गये घने काले धुआं उनकी तरफ बढ़ने लगे क़ौम ने यूनुस (अलैहीस सलाम) को तलशना शूरु कीया लेकिन वो नहि मिले तो उनकी कौम खूद ही अपनी बीबी बच्चों और जानवरों के साथ एक मैदान में जमा हो गये और अल्लाह ताला के बारगाह में रो रो कर अपनी गुनाहों की माफी मांगने लगे  तोअल्लाह ताअला न उन्न पर से आजाब को टाल दिया
 कीसी भी कफीर कौम की इतिहास में और अल्लाह ताला की सुन्नत जरीया में पहली मिशाल है कि आजाब देखने के बाद ईमान लाना फैदामन्द साबित हुआ हो नहीं तो अल्लाह तआला की सुन्नत या तरिका येहि है की एक बार आजाब का वक़्त मुकर्रर हो जाए तो फिर टालता नहींयूनुस (अलैहीस सलाम) आपनी कौम से दुर चले गये  लेकिन वो अते-जते मुसाफ़िर से आपना क़ौम का हाल दरियाफ्त करते।  जब उन्हे मालूम हुवा के अल्लाह तआला उनकी कौम पर से आजाब टाल दिया है तो भी वो वपस नही गाये।  क्योंकि उनकी  कौम ने उनको झुटलाया था।  इसीलिए उनकी ग्यरत ने  गंवारा ना किया के वो वपस जाए

 • मझली के पेट का सफर:

 अब चलते-चलते रास्ते मे एक दरिया (समंदर) आया  यूनुस (अलैहिस सलाम) एक कश्ती (नाव) मैं सवर हो गया  काशती (नाव) जब मझधार मैं पहुंची तो हिचकोले खाने लगि  कशती (नाव) मी जितने भी लोग सावर थे  उन मे से एक न काहा लगता है हम से एक गुनाहगार इस कशती मैं सवार है  हमे कुर्रा अंदाज़ी करना चाहीये की वोह गुनाहगार कौन है तीन बार कुर्रा अंदाजी की गयी और तीनो बार यूनुस (अलैहीस सलाम) का नाम निकला  काशती (नाव) के मुसाफिरो ने यूनुस (अलैहीस सलाम) को दरिया (समुंदर) मे डाल दी  वहां एक बड़ी मछली (सार्क मछली) ने यूनुस (अलैहीस सलाम) को निगल लिया  इस तरह यूनुस (अलैहीस सलाम) मछली के पैट मैं पहूंच गयाकाइ दीनो तक वो माचछली के पेट मी ही रहे  वहां उन्होंने अल्लाह तआला से ये दुआ की ऐ अल्लाह तआला कोई नही माबूद सीवाए तेरे तू पाक है और मेने ही अपनी जान पर जुल्म रकया  ऐ अल्लाह तआला मेरे खताओं को माफ कर दे  अल्लाह ताला ने यूनुस (अलैहीस सलाम) की दुवा क़बूल की  और इस तरह मछली ने उनको किनारे पे ला कर उगल दीया  और वो आपनी क़ौम के तरफ लोट गये

 संदर्भ:(कसास-उल-अंबिया)








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